
महात्मा गांधी के साथ डॉ. सुशीला नैयर - फोटो : सोशल मीडिया
Lok Sabha Election 2024 : साल 1957 में देश में दूसरे आम चुनाव हुए थे। पहले चुनाव में मिली बम्पर सफलता के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद थे। उधर, झांसी के पहले सांसद रघुनाथ विनायक धुलेकर से हिंदी को राजभाषा बनाने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से अनबन हो गई थी। नतीजतन, नेहरू ने अगले चुनाव में उनका टिकट कटवा दिया और डॉक्टर सुशीला नैयर को झांसी से चुनाव लड़ने का आदेश दिया। इसके पहले वह महात्मा गांधी की निजी चिकित्सक रहीं थीं और उनका अधिकतर समय बापू के साथ ही बीता था। जिस समय महात्मा गांधी की हत्या हुई थी, डॉक्टर नैयर उनके बगल में खड़ी थीं, जबकि दूसरी तरफ मनुबेन थीं।
1957 में चुनाव लड़ने का मौका मिला
26 दिसंबर 1914 को पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) के कुंजाह शहर में जन्मीं डॉक्टर सुशीला नैयर ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी की शिक्षा ग्रहण की थी। वर्धा में फैले हैजा के दौरान उन्होंने अकेले ही लोगों की सेवा की, जिससे वह सुर्खियों में आ गई। वह वर्ष 1952 में पहली बार दिल्ली विधानसभा से चुनाव जीतीं और विधानसभा अध्यक्ष रहीं। वर्ष 1957 में उन्हें झांसी लोकसभा क्षेत्र से सांसद का चुनाव लड़ने का मौका मिला।
केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया
जिसमें उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के चंदन सिंह को पराजित किया। वह वर्ष 1962 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पन्नालाल और वर्ष 1967 में भारतीय जनसंघ के रमानाथ खैरा को हराकर सांसद चुनी गईं। उन्हें केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। वर्ष 1971 में इंदिरा गांधी से अनबन के कारण उन्होंने दूसरे गुट कांग्रेस ऑर्गनाइजेशन के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस (इंदिरा) के डॉक्टर गोविंद दास रिछारिया से हार गईं। डॉक्टर नैयर ने वर्ष 1977 के चुनाव में फिर वापसी की और जनता पार्टी समर्थित भारतीय क्रांति दल के टिकट पर जीतकर चौथी बार सांसद बनीं। वर्ष 1980 में वह तीसरे और 1984-85 में चौथे स्थान पर रहीं। इन चुनावों में भी उन्होंने जनता पार्टी प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमाई थी। इसके बाद उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया।
नामांकन के ठीक पहले आईं थीं झांसी
डॉक्टर सुशीला नैयर का जब झांसी से पहली बार टिकट फाइनल हुआ, तो इसके पहले वह कभी झांसी नहीं आई थीं। राजनीति के जानकार बताते हैं कि नामांकन के ठीक पहले झांसी आई थीं और 2 हजार से ज्यादा लोग उन्हें रेलवे स्टेशन पर लेने पहुंचे थे। उनसे पहले सांसद रहे रघुनाथ धुलेकर खुद उन्हें लेने स्टेशन गए थे।
झांसी में लिखी थी विकास की गाथा
डॉक्टर सुशीला नैयर ने सांसद रहते हुए झांसी में मेडिकल कॉलेज और बेतवा पुल बनवाया। उस समय उम्र में गिने-चुने ही मेडिकल कॉलेज थे, जबकि बुंदेलखंड में एक भी मेडिकल कॉलेज नहीं था।
Published on:
02 Apr 2024 09:55 am
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