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गोदाम में डीएपी उतरते ही टूट पड़े किसान, 3 घंटे में बिक गयी 20 हजार मीट्रिक टन खाद

झांसी के किसान यूरिया खाद के लिए भटक रहे हैं। खाद समय से नहीं मिल पा रही है। सुबह से लंबी-लंबी लाइनें लग रही है। सहकारी समितियों और निजी दुकानों पर कम बचा स्टॉक।

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Shortage of urea fertilizer in Jhansi

झांसी में खाद की बोरी ले जाते किसान।

झांसी में डीएपी के लिए भटक रहे किसानों को फौरी राहत तो मिल गयी है। बुआई जब अंतिम चरण में है, तब डीएपी बांटना शुरू हुई है, लेकिन किसानों ने इसका भी फायदा उठाया। गोदाम में डीएपी उतरते ही 3 घण्टे के अन्दर आधे अधिक स्टॉक खत्म हो गया। सुबह से लगी भीड़ दोपहर होते-होते छूट गयी। रबी सीजन में बुआई के समय ही डीएपी खाद डाली जाती है।


30 नवंबर तक होती है मांग

क्षेत्र में अमूमन डीएपी की मांग 30 नवम्बर तक होती है। समय नजदीक था और जिले में डीएपी कम थी। कृषि विभाग पुराने स्टॉक से काम चला रहा था, जबकि सहकारी समितियों में स्टॉक शून्य था। ऐसे में किसान डीएपी के लिए परेशान हो रहा था। चिरगांव, मोठ और बड़ागांव क्षेत्र में डीएपी के लिए सुबह से लाइन लग रही थी, लेकिन किसानों को निराश होकर लौटना पड़ रहा था। सोमवार की शाम इफ्को और निजी कम्पनी चम्बल की लगभग 2,700 मीट्रिक टन डीएपी की रेक झांसी आयी, जिसका मंगलवार को सुबह 9 बजे से वितरण शुरू हुआ। 12 बजे तक कृषि विभाग की 24, 571 मीट्रिक टन में से 21 हजार मीट्रिक टन एवं सहकारिता विभाग की 13,400 मीट्रिक टन डीएपी बिक गयी। सहायक निबन्धक सहकारिता हिमांशु कुमार का कहना है कि जिले में अब लगभग 4 हजार मीट्रिक टन डीएपी बची है। माना जा रहा है कि डीएपी की मांग अब कम हो जाएगी, क्योंकि देर से बुआई करने वाले किसान ही डीएपी खरीदने आएंगे।


तय मात्रा से ज्यादा खाद खरीदने वाले किसानों पर होगी कार्यवाही

नियमानुसार प्रत्येक किसान को एक बैग डीएपी और एक बोरी यूरिया प्रति एकड़ की दर से दी जाती है। इसके बावजूद कई किसान तय मात्रा से अधिक डीएपी खरीद ले गए। सहकारी समितियों और अन्य विक्रय संस्थाओं ने भी इसे नजरअंदाज कर दिया। जब पॉश मशीन से मिलान हुआ तो गडबडी पता चली। इस पर जिलाधिकारी ने उन किसानों का ब्यौरा तलब कर लिया है, जिन्होंने तय मात्रा से अधिक डीएपी खरीदी। ऐसे किसानों पर कार्यवाही की तैयारी की जा रही है।


मप्र के किसानों ने बिगाड़ी व्यवस्था

जिले में डीएपी की किल्लत बढ़ने का प्रमुख कारण समीपवर्ती मप्र के किसानों द्वारा यहां से उठायी गयी डीएपी है। मप्र विधानसभा चुनाव के चलते झांसी जिले की सीमा से सटे मप्र के इलाकों में खाद की बिक्री नहीं हो रही थी। इस पर मप्र के किसानों ने झांसी जिले में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के अभिलेखों पर डीएपी खरीद ली, जिससे यहां डीएपी की किल्लत बढ गयी। वहीं, सहकारी समितियों के सदस्य न होने वाले किसानों ने भी समितियों से खाद खरीदी, जिससे कई सदस्य डीएपी खरीदने से वंचित रह गए।


यूरिया की नई रेक आएगी

1 दिसंबर से यूरिया की मांग बढ़ जाएगी। जिले में अभी लगभग 32 हजार मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जबकि खपत 42 हजार मीट्रिक टन यूरिया की है। इस हिसाब से अभी 10 हजार मीट्रिक टन यूरिया की और जरूरत पड़ेगी। इसके बावजूद यूरिया की किल्लत नहीं होगी। दो-तीन दिन में 3 हजार मीट्रिक टन यूरिया की नई रेक झांसी आने वाली है। इसके अलावा उरई में भी झांसी के नाम आवंटित यूरिया का स्टॉक बफर में रखा है। दिसंबर मध्य में भी यूरिया की और उपलब्धता होने की उम्मीद है।


पीसीएफ पर मनमानी करने का आरोप

डीएपी वितरण प्रक्रिया आरोपों के घेरे में आ गयी है। पालर बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति के सदस्यों ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि यहां मनमाने तरीके से खाद का वितरण किया जा रहा है, जिससे खाद समय से समितियों पर नहीं पहुंच पा रही है और किसानों को प्राइवेट दुकानों से ब्लैक में खरीदना पड़ रही है। समितियों द्वारा खाद के लिए गुड फॉर पेमेंट की चेक लगने के बाद 15 दिन से 1 माह तक भी खाद नहीं पहुंचती, जिससे समितियों को घाटा हो रहा है, क्योंकि जिस तारीख को चेक लगती है उसी दिन से बैंक ब्याज लगाना शुरू कर देता है।