
झांसी. बुंदेलखंड में किसानों ने इस बार अनोखे तरीके का विरोध शुरू किया है। कर्ज के जंजाल, सूखे की समस्या और सरकार की उदासीनता से परेशान किसानों ने अब नए तरह के आंदोलन का ऐलान कर इसे सत्याग्रह का नाम दिया है। बुंदेलखंड किसान पंचायत के इस आंदोलन की शुरुआत झांसी से हुई है। संगठन का दावा है कि यह आंदोलन पूरे बुन्देलखण्ड तक ले जाया जाएगा। पहले चरण में बहुत सारे किसान इस अभियान से जुड़ चुके हैं। अभियान से जुड़े किसानों का कहना है कि केसीसी से लिए गए कर्ज की किश्त वे अब जमा नहीं करेंगे और सरकारी कार्यक्रमों व सुनवाई दिवसों का भी बहिष्कार करेंगे।
किन मांगों को लेकर है असहयोग की तैयारी
बुंदेलखंड किसान पंचायत के अध्यक्ष गौरी शंकर विदुआ कहते हैं कि पूरे बुन्देलखण्ड को सूखाग्रस्त घोषित करते हुये और किसानों की बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा दिया जाए। किसानों के कर्जमाफी में भेदभाव न करते हुए सभी किसानों के सभी तरह के कर्जे माफ किये जायें। फसल बीमा की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए और बिजली व पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। कृषि, सिचाई, बिजली विभाग, थानों सहित अन्य सरकारी विभागों के भ्रष्टाचार को दूर किया जाए क्योंकि किसानों को हर इन विभागों के कर्मचारियों और अफसरों से परेशान होना पड़ता है।
इस तरह शुरू हुआ असहयोग
बुंदेलखंड में किसानों के असहयोग आंदोलन का पहला चरण शुरू हो चुका है। पंचायतें आयोजित कर बड़ी संख्या में किसानों को असहयोग आंदोलन से जोड़ने की तैयारी चल रही है। बुन्देलखण्ड किसान पंचायत के अध्यक्ष गौरी शंकर विदुआ कहते हैं कि यदि सरकार चाहती है कि किसान कर्ज की किश्तें जमा करें तो पहले फसल बीमा में पिछले पंद्रह वर्षों में वसूली गई रकम का हिसाब देने के साथ ही किसानों को फसल बर्बादी का मुआवजा दे। विदुआ कहते हैं कि मुआवजे से पहले कोई भी किसान कर्ज की किश्तें नहीं भरेगा। पिछले पंद्रह दिनों से कई गांव में चौपाल लगाकर किसानों इस असहयोग से जोड़ा जा रहा है। सरकारी अफसरों के भ्रष्टाचार और किसानों को लेकर उनकी उदासीनता के कारण किसानों की समस्या हल नहीं हो रही है, इसलिये थाना दिवस, तहसील दिवस और जन सुनवाई जैसे कार्यक्रमों का भी बहिष्कार किया जाएगा।
Published on:
18 Jan 2018 12:11 pm
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