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ताले में बंद है आरओ का शुद्ध और मीठा पानी, 20 रुपये में मिल रही एक लीटर पानी की बोतल

- झांसी रेलवे स्टेशन का हाल- बीस रुपये में बिक रही है 15 रुपये वाली एक लीटर पानी की बोतल- ज्यादातर स्टेशनों और ट्रेनों में धड़ल्ले से बिक रहा है लोकल ब्रांड पानी

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Jhansi Railway Station

ताले में बंद है आरओ का शुद्ध और मीठा पानी, 20 रुपये में मिल रही एक लीटर पानी की बोतल

झांसी. केरला एक्सप्रेस में बीते दिनों गर्मी के कारण हुई चार लोगों की मौत के बाद रेलवे की बदइंतजामियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में झांसी रेलवे स्टेशऩ पर पानी की कुछ अलग ही कहानी नजर आई। यूं तो यहां हर प्लेटफार्म पर आरओ का शुद्ध पानी एक रुपये लीटर मुहैया कराने के लिए आईआरसीटीसी के सहयोग से वाटर प्वाइंट बनाए गए हैं, लेकिन ये किसी काम के नजर नहीं आते। इन पर अधिकांशतः ताला पड़ा रहता है और पानी मिलता नहीं।

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प्लेटफार्म पर बनाए गए हैं वाटर प्वाइंट
झांसी के लगभग हर प्लेटफार्म पर ये वाटर प्वाइंट हैं। इन पर आईआरसीटीसी के लोगो के साथ ही इनका उद्देश्य दिखाया गया है। इसमें एक नारा दिया गया है- आरओ का शुद्ध पानी, न बीमारियां और न परेशानी। ऐसी भीषण गर्मी में पानी के लिए होने वाली परेशानियों को देखते हुए ये नारा तो खोखला लगता है। बानगी के रूप में झांसी के प्लेटफार्म नंबर एक और छह पर लगाए गए वाटर प्वाइंट की स्थिति को देखने से हकीकत सामने आ जाती है। ये दोनों ही वाटर प्वाइंट अपरान्ह करीब चार बजे खाली पड़े थे। लोग पानी के लिए परेशान हो रहे थे। एक रुपये का सिक्का डालने पर पानी निकलने का दावा करने वाले ये वाटर प्वाइंट इसमें डाला गया एक रुपये का सिक्का तुरंत ही वापस बाहर कर दे रहे थे। ऐसे में लोगों को मायूसी हाथ लगी और उन्हें पानी के लिए रेलवे के दूसरे स्टैंडपोस्ट का सहारा लेना पड़ा।

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15 रुपये वाली पानी की बोतल 20 में
इसके अलावा गर्मी में पानी की जबरदस्त मांग को देखते हुए वैंडर मनमानी पर उतर आए हैं। जैसे ही ट्रेन प्लेटफार्म पर आकर रुकती है, लोग पानी के लिए काउंटर की तरफ लपकते हैं, तो पहले कह दिया जाता है कि पानी ठंडा नहीं है। फिर, उन्हें 20 रुपये में सामान्य ठंडे पानी की बोतल पकड़ा दी जाती है। ऐसे में अगर कोई ग्राहक इसके पंद्रह रुपये में देने की बात कहता है, तो उसे पानी नहीं है कहकर 20 रुपये देने वाले ग्राहक को पानी की बोतल पकड़ा दी जाती है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर लोकल ब्रांड या डुप्लीकेट ब्रांड की बोतलें बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाने का खेल चल रहा है।

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ट्रेनों में है ये हाल
इसके अलावा ट्रेनों में भी पानी की जमकर कालाबाजारी सी चल रही है। न तो कोई देखने वाला है और न ही कोई कहने वाला। ऐसे में लोगों को पैंट्रीकार के स्टाफ की मनमानी की शिकार होना पड़ रहा है। रेलवे स्टेशन पर गाड़ी रुपये पर स्टेशन के वैंडर भी लोकल ब्रांड पानी की बोतलें 20-20 रुपये में बेचते नजर आते हैं और प्यासे लोगों के सामने इसे ही खरीदने की मजबूरी रहती है।

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