
फोटो सोर्स- पत्रिका
'Kavach' will protect the train from back-to-back collision: झांसी मंडल के अंतर्गत आने वाले रेलवे ट्रैक पर कवच नाम की डिवाइस लगाई जा रही है जो ट्रेनों को आपस में टकराने से बचाने का कार्य करेगी। इसके उपयोग में आने से दो ट्रेनों में आपस में टक्कर नहीं होगी और यह कवच 3 से 4 किलोमीटर की रेंज में काम करता है लेकिन ट्रैकिंग क्षमता 25 किलोमीटर की है। जैसे ही एक पटरी पर आमने-सामने ट्रेन आएगी। कवच अपना काम शुरू कर देगा और दोनों गाड़ियों में ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएगा। कवच का इस्तेमाल झांसी-कानपुर और झांसी-मानिकपुर रुट पर किया जायेगा।
डीआरएम अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि कवच में आरएफआईडी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। जिसके माध्यम से एक ट्रैक पर आमने-सामने यदि ट्रेन आ जाती है तो कवच ऑटोमेटिक ट्रेन में ब्रेक लगाने का काम करता है। कवच के कारण दुर्घटनाओं की संभावनाएं खत्म हो जाती है। कवच का इस्तेमाल मुरैना के पास किया गया है। दूसरे चरण में झांसी से मानिकपुर और कानपुर रुट पर लगाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के झांसी मंडल रेल प्रबंधक ने बताया कि कवच आधुनिक तकनीक आरएफआईडी का इस्तेमाल किया गया है यह कवच रेलवे ट्रैक किनारे स्थित टावर और ट्रेन के इंजन में लगाया जाता है। यदि गलती से एक ही पटरी पर दो ट्रेन आ जाती है तो कवच अपना काम शुरू कर देता है गाड़ियों में ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाता है जिससे टकराने की संभावना है खत्म हो जाती है।
डीआरएम ने बताया कवच 25 किलोमीटर की दूरी से गाड़ियों की ट्रैकिंग शुरू कर देता है यह स्पीड की भी जानकारी प्राप्त करता है कि कौन गाड़ी किस स्पीड में चल रही है और कहां है? यही सिस्टम दूसरी गाड़ी के लिए भी होता है। जैसे ही दोनों गाड़ियों की एक ही पटरी पर होने का संकेत मिलता है कवच अपना काम करने लगता है और दोनों गाड़ियों में ब्रेक लगा देता है यह सब ऑटोमेटिक होता है। यह स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। झांसी डिविजन के मुरैना तक कवच डिवाइस से लगाने का काम पूरा हो गया है। 2027 तक बीना स्टेशन का तक डिवाइस लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
Published on:
03 Apr 2026 05:43 pm
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