
एक छींक से निकलते हैं इस रोग के 1000 बैक्टीरिया, जिले में 13 रोगी मिले
झांसी। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में पहली बार कुष्ठ रोगी खोज अभियान 16 से 29 जुलाई तक चलाया गया। इसमें जिले भर में 1657 टीमें गठित की गयी थी। इन टीमों द्वारा जिले में 1275 संदिग्ध कुष्ठ रोगी पाये गए। बाद में इन संदिग्ध रोगियों की जांच के बाद कुल 13 नए कुष्ठ रोगी पाए गए। इस संबंध में बताया गया है कि यह टीबी की तरह ही बैक्टीरिया से फैलने वाला रोग है। किसी भी संक्रमित व्यक्ति की छींक से एक बार में 1000 बैक्टीरिया निकलते हैं।
ऐसी है स्थिति
इन 13 मरीजों में से 4 मोंठ के, 3 गुरसंराय के, दो चिरगांव व दो मऊरानीपुर के एवं बड़ागांव का 1 और झांसी का 1 कुष्ठ मरीज है। इस अभियान के तहत बच्चों का भी निरीक्षण किया गया। इसमें खास बात यह रही कि बच्चों में कुष्ठ के लक्षण नहीं पाये गए। वर्तमान में झांसी में 109 कुष्ठ रोगियों का इलाज किया जा रहा है और इन 13 नए मरीजों को भी उपचार पर रखा गया है। नॉन मेडिकल असिस्टेंट विनोद कुमार मौर्या ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत संदिग्ध रोगियों की खोज के लिए झांसी जनपद के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र दोनों में कुल मिलकर 19 लाख 22 हजार 781 लोगों का निरीक्षण किया गया था। हालांकि यह अभियान समाप्त हो चुका है लेकिन संदिग्ध रोगियों की निरंतर जांच की जा रही है। उनकी पुष्टि होने पर जल्द से जल्द इलाज पर रखा जाएगा।
धीरे-धीरे कम हो रही है संख्या
विनोद मौर्या के अनुसार झांसी में कुष्ठ रोगी अब धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। इसी वजह से इस अभियान के अंतर्गत झांसी को लिया गया है। इससे घर-घर जाकर उन लोगों का पता लगाया जाए जो अज्ञानता के अभाव में अस्पताल नहीं आए हैं। वर्तमान में 309 दिव्यांग कुष्ठ रोगियों को जीवन यापन करने के लिए पेंशन दी जा रही है। उन्होंने बताया कि झांसी में हर साल कुष्ठ रोगियों का औसतन अनुपात 6 व्यक्ति प्रति 1 लाख में रहता है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य था कि किसी भी व्यक्ति में कुष्ठ की वजह से विकलांगता न होने पाये।
ये है कुष्ठ रोग का कारण
डा. महेंद्र कुमार, डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी ने बताया कि कुष्ठ रोग का बैक्टीरिया टीबी के बैक्टीरिया की प्रजाति का होता है। यह किसी संक्रमित व्यक्ति के छींकने से फैलता है। एक संक्रमित व्यक्ति के छींकने से एक बार में 1000 से ज्यादा बैक्टीरिया निकलते हैं। इस दौरान यदि सामने वाले व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, तो ऐसे व्यक्ति पर यह बहुत जल्दी हावी हो जाता है। यह बैक्टीरिया सीधे जाकर नसों और मांसपेशियों में असर करता है।
कुष्ठ रोगियों के प्रकार और उनकी दवाएं
डा.महेंद्र कुमार ने बताया कि दो तरह के मरीजों के लिए दो तरह की दवाएं दी जाती है। एक ऐसे रोगी जो असंक्रामक रोगी के रूप में होते हैं जिनसे कुष्ठ रोग फैलने का डर नहीं होता है। उनके लिए छः माह तक पौसी बैसिलरी की दवा दी जाती है। वहीं दूसरे ऐसे रोगी जो संक्रामक रोगी के रूप से में होते है, उनके लिए 12 माह तक मल्टी बैसिलरी की दवा दी जाती है। उन्होंने बताया कि यदि कुष्ठ को शुरुआती दौर में जांच और ट्रीटमेंट लेता है तो उसके बैक्टीरिया को रोका जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप एक तो नए मरीज नहीं मिलेंगे और दूसरे विकलांगता की स्थिति भी पैदा नहीं होगी।
Published on:
13 Aug 2018 03:03 pm
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