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रूढ़ियां तोड़कर सड़क पर उतरी अनीता की हत्या, झांसी की पहली महिला ऑटो चालक की कहानी दर्द में खत्म

Jhansi Murder: झांसी की पहली महिला ऑटो चालक अनिता चौधरी की हत्या ने पूरे बुंदेलखंड को झकझोर दिया है। सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर परिवार का सहारा बनी अनिता की खून से सनी लाश स्टेशन रोड पर मिली। लूट और हत्या की इस वारदात ने महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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झांसी

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Ritesh Singh

Jan 06, 2026

समाज की रूढ़ियों को तोड़ने वाली अनिता चौधरी की हत्या (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

समाज की रूढ़ियों को तोड़ने वाली अनिता चौधरी की हत्या (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Jhansi Murder Anita Chaudhary: बुंदेलखंड की धरती, जो कभी डकैतों के लिए जानी जाती थी और जहां आज भी सामाजिक रूढ़ियां यह तय करती हैं कि कौन क्या काम करेगा, उसी क्षेत्र में एक महिला ने साहस दिखाकर इतिहास रचा था। झांसी की पहली महिला ऑटो-रिक्शा चालक अनिता चौधरी की कहानी हिम्मत, आत्मसम्मान और संघर्ष की मिसाल थी। लेकिन सोमवार तड़के उनकी यह संघर्षपूर्ण यात्रा हिंसक तरीके से समाप्त हो गई। 45 वर्षीय अनिता चौधरी की झांसी में निर्मम हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है।

स्टेशन रोड पर खून से सनी लाश मिली

पुलिस के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 2.30 बजे झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत स्टेशन–सिविल लाइंस रोड पर एक स्कूल के पास अनिता चौधरी का खून से सना शव मिला। स्थानीय लोगों ने सड़क किनारे महिला को घायल अवस्था में पड़ा देख पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि कुछ दूरी पर उनका ऑटो-रिक्शा पलटा हुआ पड़ा था।

शुरुआत में इसे सड़क दुर्घटना माना गया, लेकिन शव की स्थिति और चोटों को देखकर परिजनों ने इसे हत्या करार दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने परिजनों की आशंका को सही साबित किया। झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीटीएस मूर्ति ने पुष्टि की कि अनिता की हत्या की गई है। पोस्टमार्टम में उनके गले में गोली लगने की बात सामने आई है।

लूट के बाद हत्या की आशंका

अनिता के शरीर पर चोटें केवल सिर और गर्दन के आसपास पाई गईं। शरीर के अन्य हिस्सों पर किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं थी। उनके गहने मंगलसूत्र, झुमके, पायल और मोबाइल फोन मौके से गायब थे। इससे परिजनों ने लूट के बाद हत्या की आशंका जताई है। अनिता के पति द्वारिका चौधरी, जो बस स्टैंड के पास ठेला लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, ने कहा कि अगर यह हादसा होता तो शरीर पर और भी चोटें होतीं। केवल सिर पर चोट है और गहने गायब हैं। यह साफ तौर पर हत्या है। 

तीन संदिग्ध हिरासत में

पुलिस ने परिजनों की तहरीर पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। एसएसपी बीबीटीएस मूर्ति के मुताबिक, तीन लोगों मनोज झा, शिवम झा और एक अन्य को हिरासत में लिया गया है। ये नाम एफआईआर में परिजनों द्वारा दर्ज कराए गए हैं। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है और मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। घटनास्थल पर सिटी सर्किल के क्षेत्राधिकारी लक्ष्मीकांत गौतम और एसपी सिटी प्रीति सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए और इलाके को सील कर दिया गया। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है।

रात को काम पर निकली थीं अनिता

अनिता चौधरी झांसी के तलपुरा इलाके के आंबेडकर नगर में रहती थीं। परिजनों के अनुसार, रविवार रात करीब 9.30 बजे वह घर से यह कहकर निकली थीं कि ऑटो चलाने जा रही हैं। वह अक्सर सुबह और रात दोनों समय ऑटो चलाती थीं। देर रात तक जब वह घर नहीं लौटीं तो परिवार चिंतित हो गया। करीब 3.30 बजे परिवार को फोन आया कि स्टेशन रोड पर एक महिला घायल अवस्था में मिली है।

संघर्ष और साहस की मिसाल थीं अनिता

अनिता चौधरी सिर्फ एक ऑटो चालक नहीं थीं, बल्कि सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने वाली एक मिसाल थीं। पोस्ट-कोविड लॉकडाउन के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई थी। उनके पति की कमाई घर चलाने के लिए पर्याप्त नहीं थी। ऐसे में अनिता ने खुद जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। उन्होंने करीब 15 साल तक एक निजी कंपनी में काम किया था, लेकिन 2020 में सुपरवाइजर से विवाद के बाद नौकरी छोड़ दी। कंपनी ने बाद में उन्हें वापस बुलाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। काम की तलाश में वह बच्चों के साथ महाराष्ट्र भी गईं, लेकिन कोविड लॉकडाउन के चलते कुछ ही हफ्तों में वापस लौटना पड़ा।

विरोधों के बावजूद खरीदा ऑटो

आर्थिक तंगी के बीच अनिता ने ऑटो खरीदने का फैसला किया। बैंकों ने लोन देने से इनकार कर दिया। परिवार और रिश्तेदारों ने भी एक महिला के ऑटो चलाने पर आपत्ति जताई। लेकिन अनिता नहीं रुकीं। उन्होंने खुद दस्तावेज तैयार किए और 18 फरवरी 2021 को फाइनेंस पर ऑटो खरीदा। एक पड़ोसी से उन्होंने ड्राइविंग सीखी और फिर झांसी की सड़कों पर उतर आईं। जिन इलाकों में महिला ड्राइवर की कल्पना तक नहीं की जाती थी, वहां अनिता यात्रियों को लाने-ले जाने लगीं।

सम्मान भी मिला, पहचान भी बनी

अनिता की हिम्मत और मेहनत को पहचान भी मिली। वह झांसी की पहली महिला ऑटो चालक बनीं। उनकी कहानी लोगों के लिए प्रेरणा बन गई। बाद में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें सम्मानित भी किया। लेकिन इसके बावजूद वह बेहद सादगी से जीवन जीती रहीं। उनकी बहन विनीता चौधरी कहती हैं,वह कभी शिकायत नहीं करती थीं। बस चाहती थीं कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर हमसे बेहतर जिंदगी जिएं। वह दिन में घर संभालती थीं और सुबह-शाम ऑटो चलाती थीं। वही ऑटो उनकी जिंदगी था।

न्याय की मांग

परिवार और स्थानीय लोगों में घटना को लेकर आक्रोश है। परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले। बहन विनीता ने कहा कि आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।