
यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आज जारी (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
UP Draft Electoral Rolls 2026 to Drop 28.9 Million Voters: उत्तर प्रदेश की राजनीति और चुनावी तैयारियों के लिहाज से एक अहम घटनाक्रम में आज मंगलवार को राज्य की ड्राफ्ट निर्वाचक नामावलियां (वोटर लिस्ट) जारी की जाएंगी। यह सूची चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए विशेष सघन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) अभियान के तहत प्रकाशित की जा रही है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार इस ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की संभावना है, जो अक्टूबर 2025 में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के कुल मतदाताओं का लगभग 18.70 प्रतिशत है। अक्टूबर 2025 की मतदाता सूची के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कुल 15.44 करोड़ (154.4 मिलियन) पंजीकृत मतदाता थे। यदि 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से हटते हैं तो यह राज्य के चुनावी परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।
चुनाव आयोग के आंतरिक आंकड़ों के मुताबिक संभावित नाम कटौती का सबसे ज्यादा असर शहरी क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। गाजियाबाद में लगभग 36.67 प्रतिशत नाम हटने की संभावना जताई जा रही है, जबकि राजधानी लखनऊ में यह आंकड़ा करीब 30.88 प्रतिशत है। इसके अलावा कानपुर नगर (25.62%), प्रयागराज (25.31%), मेरठ (25.21%) और आगरा (23.57%) जैसे बड़े शहरी जिलों में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या का अधिक पलायन, किराए के मकानों में रहना, बार-बार पता बदलना और दस्तावेजों का अद्यतन न होना, इन संभावित कटौतियों के प्रमुख कारण हैं।
उत्तर प्रदेश में विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की गणना प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू हुई थी। यह अभियान कई चरणों में चला और इसे कई बार विस्तार भी दिया गया। प्रारंभिक रूप से यह प्रक्रिया सीमित समय में पूरी होनी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर आई चुनौतियों के कारण इसे बढ़ाया गया। पहला और दूसरा चरण पूरा होने के बाद 11 दिसंबर तक के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 2.96 करोड़ मतदाता ‘अनकलेक्टेबल’ यानी जिनसे संपर्क नहीं हो सका, की श्रेणी में पाए गए थे। तीसरे चरण के समापन के बाद 26 दिसंबर तक यह संख्या घटकर 2.89 करोड़ रह गई।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 2.89 करोड़ संभावित हटाए जाने वाले मतदाताओं में से-
चुनाव आयोग की संशोधित समय-सारिणी के अनुसार, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन के बाद 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी। इस दौरान जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होंगे, वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना दावा प्रस्तुत कर सकेंगे। इसी तरह गलत प्रविष्टियों या अपात्र नामों पर आपत्ति भी दर्ज की जा सकेगी। इन सभी दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन की तारीख तीन बार बदली। 27 अक्टूबर को जारी प्रारंभिक कार्यक्रम के अनुसार ड्राफ्ट सूची 9 दिसंबर को प्रकाशित होनी थी। बाद में इसे पहले 16 दिसंबर, फिर 31 दिसंबर और अंततः 6 जनवरी तक के लिए टाल दिया गया। आयोग का कहना है कि अधिकतम पारदर्शिता और ज्यादा से ज्यादा पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के उद्देश्य से यह विस्तार दिया गया।
मतदाता सूची के साथ-साथ मतदान प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाने का भी फैसला किया है। राज्य में कुल मतदान केंद्रों की संख्या 1,62,486 से बढ़कर 1,77,516 हो जाएगी। यानी 15,030 नए मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। 23 दिसंबर को चुनाव आयोग ने 403 विधानसभा क्षेत्रों और 75 जिलों में प्रति मतदान केंद्र लगभग 1,200 मतदाताओं के मानक के आधार पर नए केंद्रों के आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे मतदान के दिन भीड़ कम होगी और मतदाताओं को सुविधा मिलेगी।
वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटने की संभावना ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर चिंता जाहिर की है। 14 दिसंबर को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की एक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश की आबादी लगभग 25 करोड़ है, जिसमें करीब 65 प्रतिशत लोग मतदाता होने चाहिए, यानी लगभग 16 करोड़। लेकिन SIR प्रक्रिया के दौरान अब तक केवल करीब 12 करोड़ नाम ही दर्ज हो पाए हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि हटाए जा रहे मतदाता किसी एक वर्ग या विरोधी दल के नहीं हैं, बल्कि इनमें से 85 से 90 प्रतिशत मतदाता उनके अपने समर्थक भी हो सकते हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान को संगठन को सतर्क करने के संदेश के तौर पर देखा गया। वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने वाले नेताओं को SIR प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं, उन्हें शामिल कराया जाए।
Published on:
06 Jan 2026 09:10 am
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