
युवाओं के अहसासों में आज भी जिंदा हैं नेताजी सुभाषचंद्र बोस
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान में नेताजी सुभाषचंद्र की जयंती मनाई गई। यहां आयोजित एक कार्यक्रम में वक्ताओं ने नेताजी के व्यक्तित्व और कृतित्व का जिक्र कर युवाओं से उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं के अहसासों में नेताजी आज भी जिंदा हैं और हमेशा जिंदा रहेंगे।
नेताजी के राष्ट्रप्रेम से प्रेरणा लें युवा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं एनएसएस के समन्वयक डा. एसके राय ने कहा कि देश को आजादी दिलाने में नेताजी सुभाषचंद्र बोस का अहम योगदान रहा। उन्होंने इंडियन सिविल सर्विसेज यानी आईसीएस जैसी बड़ी परीक्षा को पास करने के बाद भी ब्रिटिश हुकूमत का हिस्सा बनने की जगह देश को आजाद कराने के लिए संघर्ष का रास्ता अख्तियार किया। कालांतर में उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन कर अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया। उनके क्रियाकलापों से अंग्रेजों के पैर उखड़ गए। उन्होंने भारत को उपनिवेशवाद से मुक्त कराने में बड़ी भूमिका निभाई। देश प्रेम का जज्बा उनमें कूट.कूटकर भरा हुआ था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए उन्होंने जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज का गठन किया था। उनकी ओर से दिया गया ‘जय हिंद’ का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया। विद्यार्थियों को उनके राष्ट्रपे्रम से प्रेरणा लेनी चाहिए।
देश को तरक्की के रास्ते पर ले जाने का प्रयास करें
विशिष्ट अतिथि जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान के अध्यक्ष डा. सीपी पैन्यूली ने कहा कि युवाओं को नेताजी सुभाषचंद्र बोस के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर देश को तरक्की के रास्ते पर ले जाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेताजी बहुत ही मेधावी और संवेदनशील व्यक्ति थे। उन्होंने हमेशा ही समाज के वंचित वर्गों के हित के लिए सोचा और काम भी किया। मुख्य वक्ता गगन अवस्थी ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के व्यक्तित्व के विविध पहलुओं को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों से उनसे प्रेरणा ग्रहण करने का आह्वान किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजादी दिलाने के लिए अपना सर्वस्व दांव पर लगा दिया। ऐसा उन्होंने राष्ट्रप्रेम की भावना के बलवती होने के कारण ही किया। वे जीवन को सार्थक रूप में जीना चाहते थे।
छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो सुनील कुमार काबिया ने कहा कि नेताजी का नाम जुबान पर आते ही देशप्रेम का जज्बा गहरा हो जाता है। उनके व्यक्तित्व का ही ये असर है कि आज भी अधिकांश युवा उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं। कार्यक्रम में फोरेंसिक साइंस विभाग की डा. अनु सिंगला, कौटिल्य एकेडमी के शाखा प्रमुख सचिन ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने देशप्रेम से ओत.प्रोत रचनाएं सुनाईं। इन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा। इसमें देवू दुबे को प्रथम, लीलाधर पांडेय को द्वितीय और संस्कृति गिरवासिया को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन ललित कला संस्थान की समन्वयक डा. श्वेता पांडेय ने किया।
इस कार्यक्रम में जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान के सतीश साहनी, डा. कौशल त्रिपाठी, उमेश शुक्ल, जय सिंह, अभिषेक कुमार, समाज कार्य संस्थान के डा. मुहम्मद नईम, ललित कला संस्थान की डा. सुनीता, दिलीप कुमार , जयराम कुटार, दिनेश प्रजापति, कमलेश कुमार और जंतु विज्ञान विभाग के डा. इकबाल खान समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।
Published on:
23 Jan 2018 08:45 pm
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