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डायरिया और हैजा से बचने के लिए बरतें ये पांच सावधानियां

डायरिया और हैजा से बचने के लिए बरतें ये पांच सावधानियां

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prevention of diarrhea and cholera

डायरिया और हैजा से बचने के लिए बरतें ये पांच सावधानियां

झांसी। बरसात के दिनों में भीषण गर्मी एवं उमस की वजह से डायरिया और हैजा जैसी बीमारियां फैलने की ज्यादा संभावना रहती हैं। इस मौसम में मक्खियां, मच्छर व काकरोंचों की संख्या बढ़ जाती है। ये खादय पदार्थों और जल को दूषित कर देते हैं। ऐसे में अगर पांच तरह सावधानियां बरती जाएं, तो सेहत संबंधी तकलीफों से बचा जा सकता है।
क्या है डायरिया
यही खादय पदार्थ और जल, शरीर के अंदर पहुंच कर डायरिया और हैजा के लक्षण पैदा कर देते हैं। डायरिया पेट की एक बीमारी है। अक्सर गर्मियों और बरसात के मौसम में यह समस्या और अधिक विकराल रूप ले लेती है। इस मौसम में तापमान के लगातार घट– बढ़ जाने की वजह से वायरल डायरिया बढ़ने की ज्यादा संभावना हो जाती हैं। दरअसल, इस मौसम में मक्खियां और मच्छर अधिकता में बढ़ जाते है, और इन्हीं से पैदा होने वाले वैक्टीरिया मनुष्यों के शरीर में पहुंच कर उल्टी और दस्त जैसे बीमारियों को जन्म देते हैं। इन दिनों जिले में स्वास्थ्य केन्द्रों में भी इन बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही हैं जो कि स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है।
बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा
वरिष्ठ चिकित्सक डा. डी एस गुप्ता ने बताया कि इस मौसम में दूषित खाना तथा दूषित पानी का इस्तेमाल करने से अमीबीय संक्रमण ज्यादा बढ़ जाता है। इसके कारण ज्यादातर व्यक्तियों में डायरिया बीमारी उत्पन्न होने लगती हैं। उन्होंने जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को डायरिया व हैजा से बचाव के उपाय के बारे में बताते हुये कहा कि लोग डायरिया व हैजा से बचने के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। साथ ही खाने-पीने वाली वस्तुओं को हमेशा ढक कर रखे, क्योकि हैजा बीमारी मक्खियों के द्वारा फैलती है। जब खाने-पीने कि चीजों पर मक्खियां बैठ जाती हैं और हम लोग वही भोजन ग्रहण करते है तो हैजा व डायरिया जैसी बीमारियां उत्पन्न होती हैं। उन्होंने बताया कि इस मौसम में जिला अस्पताल में लगभग 30 फीसदी मरीज प्रतिदिन डायरिया के आ रहे हैं।
इस जीवाणु सै फैलता है हैजा
इसके अलावा उन्होंने बताया कि हैजा रोग विब्रियो कॉलेरी नामक जीवाणु से फैलता है। यह जीवाणु संक्रमित व्यक्ति के मलमूत्र एवं कै (उल्टी) में विद्यमान रहता है। इस जीवाणु का विकास दूषितजल, दूध एवं सब्जियों, बासी भोजन तथा गंदी नालियों व अस्वच्छ वातावरण में अधिक होता है।
यह रोग स्त्री, पुरुष, बच्चे, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माता तथा सभी उम्र के व्यक्तियों में होता है। गर्भवती माता एवं बच्चे जिनकी प्रतिरक्षात्मक क्षमता कम होती, वह शीघ्र ही इस रोग के शिकार हो जाते हैं। वहीं, अक्सर लोग शुरुआत में हैजा के लक्षणों को पहचान नहीं पाते हैं, जिसकी वजह से यह समस्या गंभीर हो जाती है। इसमें रोगी को 3 से 6 घंटे में बार-बार उल्टियां व दस्त लगने लगते हैं। उन्होंने बताया कि हैजा बीमारी में व्यक्ति को पेट में दर्द नहीं होता, सीधे दस्त होने लगते। ये लगभग 20-25 बार तक होते हैं। ऐसी स्थिति में रोगी को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर मरीज थोड़ा ढीला हो जाता है तो तुरंत इस बीमारी से व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के अनुसार जनपद में जहां एक ओर जनवरी 2017 से मार्च 2018 तक हैजा बीमारी के एक भी मरीज नहीं पाये पाये गये हैं, वहीं जनवरी 2017 से 19 जून 2018 तक 56 हजार 618 डायरिया के मरीज पाये गये।
· डायरिया के क्या है लक्षण- दिन भर में 4-5 बार पतले दस्त आना।
· दस्त के साथ खून आना।
· पेट मरोड़ना
· उल्टी आना।
· बुखार होना।
· सिरदर्द , कमजोरी होना।
· बच्चों को दस्त होने पर वह दूध पीना बंद कर देते हैं।
· बच्चों में चिड़चिड़ापन आ जाता है और वह सुस्त हो जाते हैं।
हैजा के क्या है लक्षण- हैजा बीमारी में चावल के माड़ की तरह पतले दस्त लगते हैं। उल्टियां होती हैं। प्यास बहुत अधिक लगती है और पेशाब कम आता है। शरीर की मांसपेशियों में धीरे-धीरे अकड़न सी होने लगती है।
डायरिया व हैजा से बचाव के बरतें ये पांच सावधानियां-
· दूषित भोजन एवं दूषित पानी का सेवन करने से बचे।
· ओआरएस का इस्तेमाल करें।
· बासी चीजें और बाहर की चीजें न खायें। घर की ही बनी ताजी चीजें खायें।
· खाने से पहले हाथों को साबुन से अवश्य साफ करें।
· खाने को घर पर भी ढंककर रखें, क्योकि मक्खियां मनुष्य के मल पर बैठ कर यह जीवाणु अपने साथ ले आती हैं और इन्हें खाने पर छोड़ देती हैं। इससे हैजे के होने की संभावना अधिक हो जाती है।