10 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

खेतों में अमृत की बारिश: 90% क्षेत्र में बुआई पूरी, ये है किसानों का खास सफलता मंत्र!

झांसी में रबी की फसल की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और ऐसे में प्राकृतिक बारिश ने किसानों के चेहरे पर खुशी ला दी है। दिसंबर महीने की बारिश ने खेती को बहुत लाभ पहुंचने का संकेत दिया है।

less than 1 minute read
Google source verification
Crops will benefit from rain in Jhansi

इस अद्वितीय कृषि सत्र में, किसानों का संघर्ष और उनकी समर्पणशीलता ने नए रिकॉर्ड्स को स्थापित किया है।

इस वर्ष, झांसी जिले में खेतों में बोए गए सरसों के बीजों के लिए एक अद्वितीय समय देखा गया है। प्राकृतिक बरसात ने खेतों में अमृत की बारिश की जैसा काम किया है, जिससे किसानों के लिए सुखद समय आया है। बुआई के काम में भी लोगों ने विशेष ध्यान दिया है, और 90 प्रतिशत क्षेत्रफल में बोने गए सरसों के बीजों से लगभग पूरा क्षेत्र बुआई के लिए तैयार हो गया है।

अच्छे उत्पादन का होगा अनुभव

खेती के लिए चयन किए गए दलहनी फसलों पर भी किसानों ने अधिक ध्यान दिया है, और खेतों में बोए जा रहे बीजों के साथ ही उन्होंने अपने अनुभव से निर्णय लिया है। इससे उम्मीद है कि इस वर्ष किसानों को अच्छे उत्पादन का अनुभव होगा।

15 दिसंबर तक का है समय

रबी फसलों की बुआई का समय 30 नवम्बर तक होता है, लेकिन कुछ किसान देर से बुआई करते हैं, और इसके लिए 15 दिसंबर तक का समय है। इस समय सीमा के बाद बुआई करने वाले किसानों को तकनीकी और पैम्पिंग सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होती हैं, जिससे उनका उत्पादक्षमता पर असर पड़ सकता है।

स्टॉक में है डीएपी

जिले में डीएपी की मांग कम हो गई है, लेकिन इसके आने का सिलसिला जारी है। स्थानीय सहकारी विभाग ने पहले से 150 मीट्रिक टन डीएपी स्टॉक में रखी है, और इसके अलावा बुधवार को एक नई रैक के रूप में 2,745 मीट्रिक टन डीएपी और मुन्दरापुर से प्राप्त होने की संभावना है।

यूरिया की और होगी व्यवस्था

जिला कृषि अधिकारी के अनुसार, बुआई का लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद है, और बरसात के बाद किसानों को राहत मिली है। यूरिया की कमी नहीं होने की भी आशा है, क्योंकि स्टॉक में पर्याप्त खाद उपलब्ध है। उनके अनुसार, जल्दी ही यूरिया की और व्यवस्था हो जाएगी।