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राष्ट्रकवि के इस काव्य संग्रह से घबराकर ब्रिटिश सरकार ने लगा दिया था प्रतिबंध

राष्ट्रकवि के इस काव्य संग्रह से घबराकर ब्रिटिश सरकार ने लगा दिया था प्रतिबंध

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राष्ट्रकवि के इस काव्य संग्रह से घबराकर ब्रिटिश सरकार ने लगा दिया था प्रतिबंध

झांसी। राष्‍ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्‍त की जयंती पर उत्तर मध्य रेलवे झांसी के मंडल रेल प्रबंधक अशोक कुमार मिश्र की अध्यक्षता में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गुप्‍त जी की आरंभिक रचनाएं कलकत्‍ता से निकलने वाले “वैश्‍योपकारक” में प्रकाशित होती थीं । उनका प्रथम काव्‍य संग्रह “रंग में भंग” 1909 में प्रकाशित हुआ था । देश का गौरवमान “भारत भारती” का प्रकाशन 1912 में हुआ था। इसके प्रकाशन के कुछ ही समय बाद उसकी रचनाएं गली-गली, कूचे-कूचे गूंजने लगीं। इन्होंने जन मानस में अपनी गुलामी के विरुद्ध बिगुल फूंका। इसी से घबराकर तत्‍कालीन ब्रिटिश सरकार ने इस काव्‍य संग्रह पर प्रतिबंध लगा दिया। देश के प्रति गर्व और गौरव की भावना जगाने में “भारत भारती” का विशेष योगदान रहा है। महात्मा गांधी, मैथिलीशरण गुप्‍त जी की देश भक्ति से अत्‍यंत प्रभावित थे और इसीलिए उन्‍होंने गुप्‍त जी को राष्‍ट्रकवि की उपाधि से नवाजा था। वास्‍तविकता यह है कि गुप्‍त जी खड़ी बोली अथवा बोल-चाल की भाषा में रचना कर अत्‍यंत लोकप्रिय हुए।

जनता की आंखें खोलने की कोशिश की

इस अवसर अपर मंडल रेल प्रबंधक/अपर मुख्‍य राजभाषा अधिकारी संजय नेगी ने कहा कि मैथिली शरण गुप्‍त ने अपने जीवन में यथार्थ भूमि पर खड़े रहकर अपने नयनों से धरती की यथार्थता को देखा, परखा, समझा और अनुभव कर उसे ज्‍यों का त्‍यों खड़ि‍या से काठ पर उतारा। खड़ि‍या से काठ पर उतारे अनमोल मोती व्‍यर्थ न जायें वे देश के जनमानस का हिस्‍सा बनें उनका दुख-दर्द बांटें। जन-जन ऐसा समझें कि लिखी गई इबारत उसके जीवन का ही हिस्‍सा भोगा हुआ सच है। अस्‍तु, गुप्‍त जी ने अपने भोगे हुए सच को मसि की सहायता से कागज पर उतारा और उसे जनता के समक्ष रखकर उनके चक्षुओं को खोलने का प्रयत्‍न किया।

इन कवियों ने सुनाईं रचनाएं

इस कवि गोष्ठी में विजय कुमार खरे, सहायक मंडल वाणिज्‍य प्रबंधक एवं ब्रजेश शर्मा ’’विफल’’ कवि- उप मुख्य टिकट निरीक्षक, सत्यपाल सिंह ’’सत्यार्थी’’ मुख्य टिकट निरीक्षक, जी.पी.तिवारी ’’अरमान ’’ जे.ई.(ड्राइंग), श्याम प्रकाश श्रीवास्तव ’’सनम’’ डबरा, कु.प्रगति शर्मा ’’बया’ कवयित्री एवं साहित्यकार, वैभव दुबे बीएचईल,झांसी, राकेश सिंह यादव, शेख आजाद ’’शेख’’ वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार राजगढ,झांसी ने अपनेी कविताओं से श्रोताओं को मनमुग्ध कर दिया। इस अवसर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक वाई एस.अतारिया, भीमराज धन्ना वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी, मुदित चंद्रा वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी, जे पी शर्मा वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर, आफताब अहमद, वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक रवीन्द्र प्रसाद, वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक वी.के.तिवारी, हरीसिंह, मंडल वाणिज्य प्रबंधक नीरज भटनागर, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर/ईस्ट भुवनेश सिंह एवं मनोज कुमार सिंह जनसंपर्क अधिकारी आदि उपस्थित रहे ।