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झांसी का ये जैन मंदिर बनने जा रहा है बुंदेलखंड का प्रमुख जैन तीर्थ

झांसी का ये जैन मंदिर बनने जा रहा है बुंदेलखंड का प्रमुख जैन तीर्थ

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renovation of karguan jain temple starts in jhansi

झांसी का ये जैन मंदिर बनने जा रहा है बुंदेलखंड का प्रमुख जैन तीर्थ

झांसी। करगुवां स्थित अतिशय जैन तीर्थ सावलियां पार्श्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ हो गया। यह मंदिर लगभग ढाई माह बाद भव्य एवं सुंदर रूप ले लेगा। जो बुन्देलखण्ड के प्रमुख जैन तीर्थ क्षेत्रों में अद्वितीय एवं दर्शनीय स्थल बनेगा।
इनकी उपस्थिति में हुआ निर्णय
आर्यिका पूर्णमति माता के सानिध्य में सकल जैन समाज, दिगम्बर जैन पंचायत समिति एवं वर्षायोग समिति के पदाधिकारियों ने एकजुट होकर जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ करने का निर्णय किया। प्रारंभ में राजीव सिर्स, सीए सुमित जैन, संजय सिंघई, मनोज सिंघई, हुकुमचंद जैन, महेश सर्राफ गुना एवं साढौरा के अध्यक्ष भरत जैन ने ध्वजारोहण किया। आर्यिका रत्न पूर्णमति ससंघ के सानिध्य में प्रात:कालीन बेला में कल्याण मंदिर विधान एवं यज्ञ मंडल विधान कराया गया। प्रात: 10 बजकर 48 मिनट पर शुभ मुहूर्त में भगवान की अस्थाई वेदी का शिलान्यास सम्पन्न हुआ। इससे पूर्व जप स्थापना भी कराई गई।
इस अवसर पर आर्यिका पूर्णमति माता ने कहा कि धर्म का कार्य सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण है। इसे सभी को आगे आकर एकजुटता के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि झांसी जैन समाज ने आचार्य विद्यासागर महामुनि से आशीर्वाद लेने के बाद मंदिर के जीर्णोद्धार का जो पुनीत कार्य प्रारंभ किया है वह आचार्य श्री के मंगल आशीष से समय पर अवश्य पूर्ण होगा। उन्होंने सकल जैन समाज का आह्वान किया कि अपने-अपने महल और अट्टालिकायें तो सभी बना लेते हैं लेकिन भगवान के मंदिर का यह निर्णय शीघ्र हो इसमें भी सभी के सहयोग की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि धर्म का कार्य तो अमृत पान के समान है।
आर्यिका पूर्णमति माता ने कहा कि समाधि एक ऐसा वाहन है जिस पर सवार होकर साधक मुक्ति का द्वार पार कर लेता है। समाधि आत्महत्या नहीं, आत्म शुद्धि की प्रक्रिया है। इसमें कषायों का शोधन होता है अर्थात् संलेखना का अर्थ जीवन का अंत नहीं त्याग का बसंत है। प्रारंभ में बालाबेहट, राधौगढ़, ललितपुर एवं गुना से आये पुण्यार्जक परिजनों ने आचार्य विद्यासागर के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्जवलित कर धर्मसभा का शुभारंभ कराया। इस मौके पर श्रीमती रजनी जैन ने भजन एवं प्रीति जैन ने मंगलाचरण किया। संचालन प्रवीण कुमार जैन ने किया। इस मौके पर ललित जैन, अभिनन्दन मोदी, रविन्द्र कुमार जैन, मूलचंद्र, राजेंद्र बडज़ात्या आदि मौजूद रहे।