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दरकने लगा है राजा समथर का राजनीतिक किला, रसूख बरकरार

किसी जमाने में इस्टेट रहे समथर के राजा रणजीत सिंह जू देव का राजनीतिक किला अब दरकने लगा है

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Ruchi Sharma

Jun 11, 2016

Raja Ranjit Singh Judev

Raja Ranjit Singh Judev

बीके गुप्ता
झांसी.
किसी जमाने में इस्टेट रहे समथर के राजा रणजीत सिंह जू देव का राजनीतिक किला अब दरकने लगा है। कांग्रेसी राज में प्रदेश के गृह राज्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचने वाले जूदेव के लिए पिछले चार विधानसभा चुनाव के कटु अनुभव तो इसी ओर इशारा कर रहे हैं। वह बात अलग है कि राजस्थान की भाजपाई मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और उत्तर प्रदेश के ताकतवर मंत्री रघुराज प्रताप सिंह (राजा कुंडा) से उनकी रिश्तेदारी के चलते उनका रसूख बरकरार है।


42 साल में लड़ चुके हैं दस चुनाव

राजा समथर के नाम से पहचाने जाने वाले रणजीत सिंह जू देव ऐसे नेता हैं जो 42 साल से कांग्रेस के ही टिकट पर चुनाव लड़ते आ रहे हैं। बदलाव के तमाम दौर में न तो उन्होंने दल बदला और न ही कांग्रेस ने कई हार के बाद अपना प्रत्याशी। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन 42 साल में जूदेव ने दस चुनाव लड़े। इसमें से वह पांच चुनाव जीते और पिछले चार चुनाव वह लगातार हार चुके हैं। इसके बावजूद गरौठा विधानसभा सीट पर अब तक कांग्रेस का कोई दूसरा नेता तैयार नहीं सका है। यही वजह है कि मिशन 2017 के चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस के सामने फिर से उन्हीं का नाम है।


सन् 1974 में बने थे सबसे कम उम्र के विधायक

जूदेव ने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत 1974 से की। इस चुनाव में जीत हासिल करके वह सबसे कम उम्र में विधायक चुने जाने वाले कांग्रेस नेता बने। इसके बाद सन् 1977 में हुए चुनाव में जनता पार्टी की आंधी भी उनकी विधायकी को हिला नहीं सकी। तब वह विधानसभा में पहुंचे कांग्रेस के गिनेचुने विधायकों में से एक थे। इसके बाद उन्होंने 1980 में लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर जीत की हैट्रिक लगाई। हालांकि 1985 में लगातार चौथी जीत का उनका सपना टूट गया। इसके बाद 1989 और 1991 के चुनाव में फिर वह लगातार विधायक बने। इसी बीच वह कई बार मंत्री बने। एक बार वह विधान परिषद के सदस्य भी रहे।


सन् 1996 के बाद से बदले राजनीतिक समीकरण

गरौठा विधानसभा सीट के समीकरण सन् 1996 के चुनाव के बाद से बदलने लगे। तब से जूदेव की गाड़ी पटरी से उतरी, तो फिर से ट्रैक पर न आ सकी। सन् 1996, 2002, 2007 और फिर 2012 के चुनाव में तो वह पिछड़ते चले गए। इन चुनावों में लगातार गिरते ग्राफ के कारण उनके राजनीतिक भविष्य पर अटकलबाजी का दौर शुरू हो गया है।


वसुंधरा राजे समधिन और राजा कुंडा है भांजे

राजा रणजीत सिंह जू देव का राजनीतिक किला जरूर कमजोर नजर आने लगा हो, लेकिन उनका रुतबा बरकरार है। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उनकी समधिन हैं। जूदेव की बेटी निहारिका सिंह उनके घर की बहू है। निहारिका सिंह उनके बेटे दुष्यंत को ब्याही है। इसी तरह से उत्तर प्रदेश सरकार के ताकतवर मंत्री रघुराज प्रताप सिंह (राजा कुंडा) उनके सगे भांजे हैं।