
झांसी. सूरदास जन्म से ही आँखों से देख पाने में अक्षम थे लेकिन अपने दोहों और कृष्णभक्ति की रचनाओं से दुनिया में एक अलग मिसाल कायम की। झांसी में भी आँखों से देख पाने में असमर्थ नफीस ने अपनी विकलांगता से हिम्मत न हारते हुए जिंदगी की चुनौती को स्वीकार किया और कुछ ऐसा कर दिखाया कि लोग उसके जज्बे को सलाम करते हैं। सैंयर गेट इलाके के पास सिलाई मशीन की दुकान पर काम करने वाले मैकेनिक नफीस की कहानी बहुत सारे लोगों के लिए एक मिसाल है। नफीस को आँखों से दिखाई नहीं देता लेकिन वह सिलाई मशीन की बेहतरीन मरम्मत कर लेता है।
झांसी के मैकेनिक नफीस की कहानी, हाथ फैलाना मंजूर नहीं था
नफीस पिछले कई सालों से सिलाई मशीन की मरम्मत के काम को इतने बेहतर तरीके से अंजाम दे रहा है कि यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल है कि इसे आंखों से दिखाई नहीं देता। नफीस की आंखें बचपन से ही खराब है। शुरू में वह अपने पिता के साथ दुकान पर आता था और छोटे-मोटे कामों में सहयोग करता था। परिवार के लोगों ने नफीस की आँखों के इलाज के लिए कई डाक्टरों को दिखाया लेकिन उसका इलाज नहीं हो सका। धीरे-धीरे नफीस ने अपने पिता के साथ रहकर मशीनों को बनाने का काम शुरू किया। अब स्थिति यह है कि नफीस झांसी के बेहतरीन सिलाई मशीन मैकेनिकों में शुमार है और दूर-दूर से लोग अपनी सिलाई मशीन की मरम्मत कराने उसके पास आते है। जिंदगी में जब विकलांगता और अन्य परिस्थितियों के चलते लोग सहारे के लिए हाथ फैलाने लगते हैं तो दूसरी ओर नफीस ने अपनी विकलांगता को चुनौती देते हुए एक मिसाल पेश की।
अब शहर के सबसे काबिल मैकेनिक में होती है गिनती
अपने हुनर के दम पर नफीस अपने परिवार का सहारा बन चुका है। वह जितना रुपया कमाता है उससे परिवार के लोगों का खर्च चलाता है। नफीस चाहता है कि सरकार उसकी कुछ आर्थिक सहायता करे, जिससे वह अपने दुकान को और अधिक बेहतर बना सके। नफीस की कारीगरी की स्थानीय लोग बेहद तारीफ करते हैं। कहते हैं इंसान का हौसला बुलंद हो और वह जिन्दगी को खूबसूरत बनाने की इच्छा रखता हो तो बाधाएं दूर हो जाती है। शारीरिक अपंगता भी बुलंद हौसलों के आगे बेबस नजर आने लगती है। कम से कम नफीस की कारीगरी और उसकी कहानी तो यही सन्देश देती है। नफीस की गिनती अब झाँसी के बेहतरीन सिलाई मशीन कारीगर के रूप में की जाती है।
Published on:
10 Jan 2018 03:41 pm
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