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ट्रेन से पकड़े गए कछुआ तस्कर, 955 बच्चे बरामद

झांसी से हुए थे ट्रेन में सवार, सीनियर डीसीएम (द्वितीय) के समन्वय ने पकड़वाए आधा दर्जन वन्य जीव तस्कर। इस मामले में अलग-अलग जगहों से 6 तस्करों को भी पकड़ा गया। इनमें दो तस्कर झांसी से जीटी एक्सप्रेस में सवार हुए थे।

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झांसी में पकड़े गए कछुआ के बच्चे।

डीआरआइ ने वन्यजीवों के अवैध व्यापार के खिलाफ की गई कार्यवाही में जीटी एक्सप्रेस व अन्य ट्रेन से तस्करी कर ले जाए जा रहे कछुओं के 955 बच्चो को बचा लिया गया। इस मामले में अलग-अलग जगहों से 6 तस्करों को भी पकड़ा गया। इनमें दो तस्कर झांसी से जीटी एक्सप्रेस में सवार हुए थे। ऑपरेशन 'कच्छप' के तहत हुई इस बड़ी कार्यवाही में झांसी मंडल के सीनियर डीसीएम- 2 ने समन्वय बनाते हुए तस्करों को गिरफ्तार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजस्व अभिसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने कल नागपुर, भोपाल और चेन्नई में गंगा में रहने वाले विभिन्न प्रजातियों के कछुओं के 955 जीवित बच्चों के साथ 6 तस्करों को पकड़ा था।

ऐसे मिली झांसी में सूचना

30 सितम्बर को झांसी मण्डल के वरिष्ट मण्डल वाणिज्य प्रबन्धक-2 अमित आनन्द को डीआरआइ से फोन आया कि कुछ तस्करों को झांसी में पकड़ना था। यह सभी तस्कर झांसी से जीटी एक्सप्रेस(12616) में झांसी में सवार हो गए हैं। उनके कोच व सीट नम्बर की जानकारी साझा कीजिए। फोन आते ही सीनियर डीसीएम-2 सक्रिय हुए और उन्होंने वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों व कण्ट्रोल कार्यालय से समन्वय बनाते थोड़ी में ही सारी जानकारी हासिल कर ली। इसे तत्काल डीआरआइ के अधिकारियों को भेजते हुए बताया गया कि एक व्यक्ति ट्रेन के कोच बी-3 में 9 नंबर सीट पर है, जबकि दूसरा व्यक्ति एस-5 में मौजूद हैं। सूचना मिलते ही दोनों को भोपाल स्टेशन पर दबोच लिया गया। बी-3 में यात्रा कर रहे तस्कर ने अपना नाम सादिक बताया। उसने बताया कि वह इन कछुओं को बेचने के लिए ले जा रहा था। डीआरआइ ने दोनों आरोपियों को पकड़कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया।


इन प्रजातियों के हैं बरामद कछुआ

बचाए गए गंगा के कछुओं की प्रजातियां इंडियन टेण्ट, इंडियन फ्लैपशेल, क्राउन रिवर, ब्लैक स्पॉटेड, पॉन्ड और ब्राउन रूफेड टर्टल हैं। बरामद कछुओं के बच्चों को सम्बन्धित वन विभाग को सौंप दिया गया।

वहीं, जानकारी देते हुए सीनियर डीसीएम अमित आनंद बताते हैं कि डीआरआई से बात होने के बाद स्थानीय स्तर पर समन्वय बनाते हुए तत्काल तस्करों के बारे में जानकारी जुटाई गई। उनके कोच व सीट नम्बर की जानकारी डीआरआइ को दी गई। परिणाम स्वरूप इन वन्य जीवों की सुरक्षा हो सकी।