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सूखे बुंदेलखंड में अब नए जमाने के ‘तालाबों’ का दौर

सूखे की भारी चपेट से कराह उठे बुंदेलखंड में बूंद-बूंद पानी के महत्व को समझते हुए अब पानी को समेटने और सहेजने के लिए नई इबारत लिखी जा रही है।

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Sujeet Verma

May 04, 2016

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झांसी.कभी चंदेल राजाओं के जमाने में बनवाए गए कुएं, बावड़ी, चौपड़ों और तालाबों के कारण बेहतरीन जलप्रबंधन के लिए मशहूर रहे बुंदेलखंड में अब नए जमाने के 'तालाबों' का दौर शुरू हो रहा है। इस बार सूखे की भारी चपेट से कराह उठे बुंदेलखंड में बूंद-बूंद पानी के महत्व को समझते हुए अब पानी को समेटने और सहेजने के लिए नई इबारत लिखी जा रही है।

इसकी शुरूआत यहां ब्रिटिश टाइम में बने सर्किट हाउस परिसर से हो रही है। यहां पर बारिश के पानी को इकट्ठा करने और उससे भूमिगत जल को रिचार्ज करने के लिए बनवाए जा रहे हैं दो बड़े-बड़े टैंक। इसके अलावा चारों तरफ पक्की नालियां बनाकर उन्हीं के जरिए सारा पानी इन टैंक में लाया जाएगा। इससे आसपास के भूमिगत जल स्तर में सुधार होने की है उम्मीद।
देर आए, दुरुस्त आए
कहावत है कि सुबह का भूला अगर शाम को घर आ जाए, तो उसे भूला नहीं कहते। कुछ इसी तर्ज पर सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड के लोगों को भी पानी का महत्व समझ में आने लगा है और इसीलिए शुरू हो गई हैं बारिश के पानी को इकट्ठा करने की कोशिशें। एक तरफ जहां निजी तौर पर लोग ऐसे कामों में लग गए हैं, वहीं सरकारी परिसरों में भी पानी को संचय करने के प्रयास शुरू हो गए हैं।

दोनों तरह से शुरू हुआ काम
इस बार के सूखे ने बुंदेलखंड को पानी के मामले में एक सबक दिया है। इसीलिए इसके लिए दो तरह से काम शुरू हुआ है। एक तरफ जहां पानी की बर्बादी को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बूंद-बूंद जल का संचय करने वाली योजनाओं पर काम शुरू हो गया है। सरकारी परिसरों में इसकी पहल झांसी के सर्किट हाउस परिसर से हुई है। यहां पर दो बड़े-बड़े टैंक बनाए जा रहे हैं। इनमें से एक का काम तेजी पर है, जबकि दूसरे की खुदाई चल रही है।

तकनीक का किया जा रहा है इस्तेमाल
इस बारे में विभाग के पूरन सिंह बताते हैं कि इन टैंक के डिजाइन और इंजीनियरिंग में वैज्ञानिक तकनीक का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें मिट्टी को जाने से रोकने की भी व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत अलग-अलग स्तर पर मिट्टी को रोकने के लिए कुछ छोटे-छोटे से टैंक भी बनाए जा रहे हैं। इन्हीं में से होता हुआ पानी टैंक में जाएगा। पहले इन छोटे टैंक में मिट्टी बैठ जाएगी।

समय-समय पर इनकी मिट्टी को निकलवाने की भी व्यवस्था रहेगी। इसके बाद मुख्य टैंक के साथ बनाए गए चैंबर में होता हुआ एकदम साफ पानी मुख्य टैंक में पहुंचेगा। यहां से पानी अवशोषित होकर अंडरग्राउंड वाटर की रिचार्जिंग करेगा। इतना ही नहीं पानी और गहराई तक ले जाने के लिए यहां बोर भी कराने की योजना है।

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