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कैराना-नूरपुर गंवाने के बाद योगी सख्त, बीजेपी विधायकों को सुना दिया ये फरमान

कैराना-नूरपुर गंवाने के बाद योगी सख्त, बीजेपी विधायकों को सुना दिया ये फरमान

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yogi's direction to bjp mla for participation in program

कैराना-नूरपुर गंवाने के बाद योगी सख्त, बीजेपी विधायकों को सुना दिया ये फरमान

झांसी। पहले गोरखपुर व फूलपुर, फिर उसके बाद अब कैराना और नूरपुर की सीटें गंवाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने तेवर कुछ सख्त कर दिए हैं। वह 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों के गठबंधऩ को बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में उनके सामने पिछले लोकसभा चुनाव वाला पार्टी का प्रदर्शन दोहराने का सबसे बड़ा संकट नजर आने लगा है। इसी वजह से अभी से योगी ने अपने विधायकों को टाइट करना शुरू कर दिया है। इसकी बानगी इटावा में हुए कार्यक्रम के बीच उन्होंने कानपुर और बुंदेलखंड प्रांत के 52 विधायकों को देखने को मिली। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधायकों से 1 से 15 जून के बीच सेक्टर स्तर पर होने वाले कार्यक्रम में हिस्सेदारी करने और केंद्र और प्रदेश सरकार की जनहितकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने को कहा।

कार्यक्रम तो पहले से ही है तय

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने गांव-गांव सेक्टर स्तर पर कार्यक्रम पहले से ही तय कर रखे हैं। इसके तहत 1 से 15 जून तक निचले स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इसमें केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रवासी कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारी दी गई है। अब प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट और नूरपुर विधानसभा सीट पर विपक्षी विजय के बाद योगी आदित्यनाथ फूंक-फूंककर कदम रखने की कोशिश में लग गए हैं। वह 2019 के लिए कोई भी रिस्क लेना नहीं चाह रहे होंगे, क्योंकि विपक्षी एकता पार्टी के परफार्मेंस पर भारी पड़ रही है। इसीलिए पहले से तय कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को भी हर हालत में हिस्सेदारी करने की हिदायत दी गई है।

ये है विधायक का कहना

इटावा में आयोजित मुख्यमंत्री की बैठक से लौटे गरौठा विधायक जवाहर राजपूत का कहना है कि मुख्यमंत्री ने 15 जून तक सेक्टर स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में विधायकों को उपस्थित रहकर केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं को बताने को कहा है। विपक्ष एकजुट होकर सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहा है, लेकिन भाजपा संगठन, विधायक और सांसद अपनी सरकारी की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में पीछे रह गए हैं।