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सूडान से लौटे राजस्थान के 3 युवक, बताई दर्दभरी कहानी, घर वापसी को मान रहे दूसरा जन्म

Sudan Conflict: सूडान की राजधानी खार्तूम में एक साल से एक कंपनी में काम कर रहा मंडावा निवासी गौरव योगी दहशतभरे माहौल से निकलकर घर पहुंचा, तो परिजन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। योगी ने बताया कि शुरू -शुरू में उन्हें मालूम नहीं था कि फायरिंग हो रही है।

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मंडावा/पत्रिका. Sudan Conflict: सूडान की राजधानी खार्तूम में एक साल से एक कंपनी में काम कर रहा मंडावा निवासी गौरव योगी दहशतभरे माहौल से निकलकर घर पहुंचा, तो परिजन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। योगी ने बताया कि शुरू -शुरू में उन्हें मालूम नहीं था कि फायरिंग हो रही है।

किसी ने मजाक में कह दिया कि फिल्म की शूटिंग हो रही है:
फायरिंग की आवाज सुनकर किसी से पूछा कि आवाज क्यों आ रही है ताे किसी ने मजाक में कह दिया कि फिल्म की शूटिंग हो रही है। इस पर चार साथी गाड़ी में बैठकर जाने लगे तो कुछ ही दूरी पर बम धमाका हुआ। कुछ लोगों ने आकर उन्हें घेर लिया। उन्होंने जेब से पैसे निकाल लिए और कहा कि भाग जाओ वरना मारे जाओगे। इसके बाद वे कंपनी के बेसमेंट में ही छुप कर रहे।

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गेस्ट हाउस मे ही बैठे रहे दस दिन तक:
परसरामपुरा के निकटवर्ती ग्राम भोजनगर के प्रेम सिंह और सुरजनपुरा के महेंद्र सिंह बुधवार रात को सूडान से सकुशल अपने घर पहुंच गए। महेंद्र सिंह और प्रेम सिंह पिछले सात साल से सूडान की ओमेगा स्टील कंपनी में स्टोर कीपर और माल डिस्पेच करने का काम करते हैं।

सूडान में गृहयुद्ध छिड़ने के बाद उनकी कंपनी के आसपास बम के धमाके गूंजने लगे। कंपनी के मालिक ने सभी राजस्थानियों को कंपनी के गेस्टहाउस में ठहरा दिया और वहीं पर उनके भोजन पानी की व्यवस्था की। लगभग 10 दिन तक गेस्टहाउस में ही रहे।

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