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62 साल बाद मिग-21 की आखिरी उड़ान, प्रिया ने बढ़ाया झुंझुनूं का मान; शेखावाटी की और भी बेटियां छू रहीं आसमान

झुंझुनूं। भारतीय वायुसेना का सबसे पुराना लड़ाकू विमान मिग-21 शुक्रवार को विदा हो गया। 62 वर्ष तक देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद चंडीगढ़ एयरबेस से इस विमान ने आखिरी उड़ान भरी। इस ऐतिहासिक मौके पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और झुंझुनूं जिले के घूमनसर गांव की बेटी स्क्वाड्रन लीडर […]

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MiG-21

मिग-21 और इनसेट में प्रिया शर्मा। फोटो: पत्रिका

झुंझुनूं। भारतीय वायुसेना का सबसे पुराना लड़ाकू विमान मिग-21 शुक्रवार को विदा हो गया। 62 वर्ष तक देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद चंडीगढ़ एयरबेस से इस विमान ने आखिरी उड़ान भरी।

इस ऐतिहासिक मौके पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और झुंझुनूं जिले के घूमनसर गांव की बेटी स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा ने संयुक्त रूप से मिग-21 की अंतिम उड़ान में हिस्सा लिया। प्रिया शर्मा ने अपने पैतृक गांव के लिए भी यादगार बना दिया।

गांव में हनुमान चालीसा, बेटी के लिए मंगलकामना

जब प्रिया शर्मा आसमान में मिग-21 के साथ उड़ान भर रही थीं, तब उनके गांव घूमनसर कलां में परिवार और ग्रामीण हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ कर उनकी सफलता और मंगलकामना कर रहे थे। प्रिया की मां प्रेम शर्मा और पिता मनोज शर्मा इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने चंडीगढ़ गए। प्रिया के दादा मदनलाल शर्मा ने बताया कि प्रिया की पोस्टिंग बीकानेर में है।

दो दिन पहले प्रिया ने उन्हें फोन कर मिग-21 की अंतिम उड़ान की जानकारी देते हुए चंडीगढ़ आने के लिए कहा था। मगर स्वास्थ्य खराब होने से वह पोती का मन नहीं रख पाए। उन्होंने परिवार तथा गांव के लोगों के साथ मन्दिर में मंगल पाठ कर प्रिया की हौसला बढ़ाया। गांव के डॉ. रामाकांत गौड़, अमित शर्मा, बजरंग स्वामी, हंसराज प्रजापत, बाबूलाल शर्मा, रामकिशन, रामेश्वर स्वामी, प्रमोद शर्मा, उद्यमी राम, पुष्पा शर्मा एवं उर्मिला शर्मा आदि मौजूद रहे।

इस मौके मिठाई भी बांटी गई। पिता मनोज शर्मा भी वायुसेना में पायलट रह चुके हैं और वर्तमान में दिल्ली एयर मुख्यालय में सेवाएं दे रहे हैं। प्रिया ने बचपन में अपने पिता को लड़ाकू विमान उड़ाते देखा तो खुद भी वही सपना देखा और ठान लिया कि बड़ी होकर पापा की तरह आसमान की ऊंचाइयों को छुएंगी। आज उनकी उपलब्धि पूरे शेखावाटी व राजस्थान के लिए गौरव का क्षण है।

शेखावाटी की और भी बेटियां छू रहीं आसमान

पापड़ा की मोहना सिंह: झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी उपखंड के पापड़ा गांव की स्क्वाड्रन लीडर मोहना सिंह राजस्थान की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं। मई 2024 में वे तेजस उड़ाने वाली पहली महिला पायलट भी बनीं। उनके दादा लादूराम जीतरवाल 1948 की भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए थे। मोहना सिंह के पिता एयर फोर्स में उच्च पद से रिटायर हुए हैं। तीन पीढ़ियां देश सेवा में जुड़ी हुई हैं।

रतनपुरा की वीणा सहारण: चूरू जिले की वीणा सहारण भारतीय वायुसेना में आइएल-76 जैसे भारी विमान को उड़ाने वाली देश की पहली महिला पायलट बनीं। कर्नल हरिसिंह सहारण और प्रेम सहारण की बेटी वीणा की इस उपलब्धि ने पूरे समाज और प्रदेश का गौरव बढ़ाया।

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