26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

झुंझुनूं पहुंचा सेना का टी 55 टैंक

jhunjhununews : भारत-पाक के बीच 1971 के युद्ध में तबाही मचाने वाला गौरवशाली गाथा का प्रतीक टी 55 टैंक शहीद स्मारक के सामने बनाए गए प्लेटफार्म पर रखा जाएगा। दुश्मन की सेना के ठिकाने नष्ट करने वाला यह टैंक अब युवा पीढ़ी को प्रेरणा देगा।

2 min read
Google source verification
झुंझुनूं पहुंचा सेना का टी 55 टैंक

झुंझुनूं पहुंचा सेना का टी 55 टैंक

झुंझुनूं. भारत-पाक के बीच 1971 के युद्ध में तबाही मचाने वाला गौरवशाली गाथा का प्रतीक टी 55 टैंक झुंझुनूं में भी देखा जा सकेगा। पुणे के खिरकी डिपो से यह टैंक झुझुनूं पहुंच गया। इसे शहीद स्मारक के सामने बनाए गए प्लेटफार्म पर रखा जाएगा। दुश्मन की सेना के ठिकाने नष्ट करने वाला यह टैंक अब युवा पीढ़ी को प्रेरणा देगा। झुंझुनूं शहर में यह पहला टैंक रखा जा रहा है। हालांकि जिले में सेना के टैंकों की संख्या अब तीन हो गई है। पिलानी में दो टैंक पहले से रखे हैं।

लगे भारत माता के जयकारे

रात को जैसे टैंक सैनिक कल्याण कार्यालय के आगे पहुंचा, अनेक संगठनों व युवाओं ने भारत माता की जय बोलकर स्वागत किया। चालक दल व टैंक के साथ आए निक्शन मीणा व बलवीर सिंह का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया। इस दौरान विभाग के प्रेमप्रकाश व अन्य मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि टैंक को रविवार सुबह प्लेटफार्म पर रखवाया जाएगा। इसके लिए विशेष क्रेन मंगवाई गई है। वहीं ढिगाल के निकट वीर चक्र विजेता कप्तान अयूब खान की पुत्रवधू शबनम व अन्य ने टैंक को सलामी व टैंक के साथ आने वालों का स्वागत किया। टैंक सात अक्टूबर को सुबह पुणे के खिरकी डिपो से रवाना हुआ था।

कार्य करते समय वजन: 36 टन

लम्बाई: नौ मीटर

चौड़ाई: 3.27 मीटर

ऊंचाई: 2.35 मीटर

क्रू मेम्बर: कमांडर, गनर, लोडर व चालक

गति: 6.85 किलोमीटर/घंटा

मुख्य कार्य: दुश्मन पर गोले व गोलियां दागना, सेना के लिए रास्ते बनाना

पहिये: इस टैंक के मोटी चैन होती है। इसी की सहायता से चलता है। यह बड़े पत्थरों पर भी चढ़ जाता है। बालू में भी नहीं फंसता ।

पिलानी में दो युद्ध टैंक पहले से

पिलानी के बिरला पब्लिक स्कूल के मुख्य दरवाजे पर सेना के दो युद्धक टैंक स्थापित हैं। भारतीय सेना के चीफ रहे जलरल वीके सिंह बिरला पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं। अपनी स्कूल से जुड़ी यादों तथा क्षेत्र के लोगों को आर्मी के प्रति प्रेरित करने के लिए उन्होंने दो टैंक फरवरी 2010 में प्रदान किए थे।