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राजस्थान के सात लाख से ज्यादा भक्त इस बार नहीं जा सकेंगे इस पवित्र जगह

#baba malketu jhunjhunu कोरोना जिस रफ्तार से बढ़ रहा है उससे लगता है परिक्रमा पर भी प्रतिबंध लग सकता है। तेरह अगस्त (गोगानवमी) से लोहार्गल से शुरू होने वाली मालकेत बाबा की चौबीस कोसीय परिक्रमा में प्रदेश सहित अन्य राज्यों से 7 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल होते हैं।

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राजस्थान के सात लाख से ज्यादा भक्त इस बार नहीं जा सकेंगे इस पवित्र जगह

राजस्थान के सात लाख से ज्यादा भक्त इस बार नहीं जा सकेंगे इस पवित्र जगह


उदयपुरवाटी(झुंझुनूं). राजस्थान व हरियाणा के लाखों भक्तों की आस्था व श्रद्धा की प्रतीक बाबा मालकेत की चौबीस कोसीय परिक्रमा इस बार नहीं होगी। कोरोना के चलते 31 जुलाई तक ऐसे धार्मिक आयोजन पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है। कोरोना जिस रफ्तार से बढ़ रहा है उससे लगता है परिक्रमा पर भी प्रतिबंध लग सकता है। तेरह अगस्त (गोगानवमी) से लोहार्गल से शुरू होने वाली मालकेत बाबा की चौबीस कोसीय परिक्रमा में प्रदेश सहित अन्य राज्यों से 7 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल होते हैं।

#lohargal
लोहार्गल के सत्यनारायण राधाकृष्ण मंदिर के पंडित पवन शर्मा बताते हैं कि यह परिक्रमा अनादीकाल चल रही है। लोहार्गल के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि परिक्रमा कभी रुकी हो। समय के साथ परिक्रमा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर वर्ष बढ़ती रही है।

#lohagarji
मार्ग में आती है सात जलधारा
-लोहार्गल
-किरोड़ी
-शाकंभरी
-नागकुण्ड
-टपकेश्वर महादेव
-शोभावती
-खोरी कुण्ड

#kotbandh
रामकिशारेदास ने शुरू की थी पालकी
परिक्रमा की अगुवाई करने वाले वाली ठाकुरजी की पालकी की शुरुआत खाकी संप्रदाय के रामकिशोरदास ने की थी। जिसके बाद से यह परम्परा चल आ रही है। पालकी की शुरुआत होने का समय तो निश्चित किसी को याद नहीं है, लेकिन दावा किया जा रहा है कि यह करीब सवा दो सौ साल पहले शुरू हुई थी। लोहार्गल के खांकी मंदिर से रामकिशोरदास के बाद विश्म्भरदास और उनके बाद वर्तमान में दिनेशदास महाराज के सान्निध्य में ठाकुरजी की पालकी परिक्रमा की अगुवाई करने के लिए निकलती है।

#baba malketu

सात दिन में यह रहता है मार्ग

लोहार्गल से शुरू होने वाली परिक्रमा गोल्याना, चिराना, किरोड़ी, कोट, शाकंभरी, नांगकुण्ड, भगोवा, टपकेश्वर महादेव, शोभावती, खाकी अखाड़ा, नीम की घाटी, डाबपनोरा, रघुनाथगढ़, खोरी कुण्ड, गोल्याना से होते वापस लोहार्गल में संपन्न होती है। सात दिन के श्रद्धा के इस सफर में श्रद्धालुओं आसमान छत तो धरती होती है बिछोना।

#24 koshiya parikrama

अब भंडारे पहले पोटली में बांधकर लाते थे
वर्तमान में परिक्रमा मार्ग में जगह जगह सैकड़ों भंडारे संचालित होते हैं। लेकिन पहले परिक्रमा मार्ग में कोई भंडारा नहीं होता था। परिक्रमा में आने वाले श्रद्धालु गोगानवमी के दिन घर में बने पकवान और सात दिन का खाना बनाने का सामान साथ लेकर जाते थे। वर्तमान में जगह-जगह सैकडों भंडारे लगते हैं।

#baba malket
करोडों का नुकसान
मेले हजारों अस्थाई दुकाने लगती हैं, जिसमें करोडों का कारोबार होता था, लेकिन इस बार व्यापारियों को भी करोडों रुपए का नुकसान होगा।


अमावस्या पर लोहार्गल का वार्षिक मेला
लोहार्गल का वार्षिक मेला परिक्रमा पूर्ण होने के साथ ही शुरू हो जाता है। मेले में दूर दराज लोग रोजगार के लिए अस्थाई दुकाने लगाने के लिए पहुंचते है। स्थानीय दुकानदारों को भी परिक्रमा व मेले के दौरान मुख्य रूप से आमदनी होती है। परिक्रमा नवमी को शुरू होती है और समापन अमावस्या को होता है।

इनका कहना है-
वर्तमान में कोरोना को देखते हुए प्रदेश सरकार की गाइड लाइन के अनुसार 31 जुलाई तक सामूहिक धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक है। जिसकी पालना करवाई जा रही है। अगस्त माह में प्रदेश सरकार की गाइड लाइन के अनुसार काम किया जाएगा। अगस्त में सरकार के क्या दिशा निर्देश होगे। उसके अनुसार ही तय होगा कि परिक्रमा होगी या नहीं।
मुरारीलाल शर्मा, एसडीएम नवलगढ।


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