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राजस्थान में छोटू को नहीं मिलेगा दूध

राजस्थान में लगभग 62 हजार आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। इनमें से चालीस प्रतिशत से ज्यादा आंगनबाड़ी केन्द्र सरकारी स्कूलों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में एक ही परिसर में छोटे बच्चे (कान्हा) को दूध नहीं मिलेगा, जबकि उनसे बड़े बालक/भाई (दाऊ) उसी स्कूल परिसर में दूध गटकते नजर आएंगे।

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राजस्थान में छोटू को नहीं मिलेगा दूध

राजस्थान में छोटू को नहीं मिलेगा दूध

Bal Gopal Yojna 2022

स्कूलों में पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए बाल गोपाल योजना शुरू कर दी गई है। योजना के तहत बच्चों को मंगलवार व शुक्रवार को दूध पिलाया जाएगा। लेकिन उसी स्कूल परिसर में संचालित आंगनबाड़ी के बच्चे दूध के लिए तरसेंगे। उनके लिए दूध की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
राजस्थान में लगभग 62 हजार आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। इनमें से चालीस प्रतिशत से ज्यादा आंगनबाड़ी केन्द्र सरकारी स्कूलों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में एक ही परिसर में छोटे बच्चे (कान्हा) को दूध नहीं मिलेगा, जबकि उनसे बड़े बालक/भाई (दाऊ) उसी स्कूल परिसर में दूध गटकते नजर आएंगे। अकेले झुंझुनूं जिले में 1595 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। इनमें से 750 केन्द्र उन्हीं सरकारी स्कूलों में संचालित हो रहे हैं, जहां बाल गोपाल योजना शुरू की गई है। ऐसे में साढ़े सात सौ केन्द्रों के बच्चों के सामने बड़े बच्चे दूध पीते नजर आएंगे।

आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों की उम्र औसत तीन से छह वर्ष के बीच है। जबकि स्कूल में पहली से आठवीं में पढऩे वालों की औसत उम्र पांच से चौदह वर्ष के लगभग है। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर आंगनबाड़ी के बच्चों को दूध क्यों नहीं दिया जा रहा है। जबकि छोटे बच्चों को तो दूध की ज्यादा जरूरत होती है।

इतना मिल रहा दूध
-कक्षा 1 से 5 तक: 15 ग्राम पाउडर से तैयार 150 एमएल दूध
-कक्षा 6 से 8 तक: 20 ग्राम पाउडर से तैयार 200 एमएल दूध
-योजना पर खर्च: 476.44 करोड़ रुपए

दे रहे दलिया व मुरमुरे

आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को मुरमुरे, दलिया, मीठी खीचड़ी व अन्य आहार नियमित दिया जाता है। दूध के आदेश आ जाएंगे तो वह भी पिला देंगे।
बिजेन्द्र राठौड़, उप निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग

दूध मिलना चाहिए
सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए दूध शुरू किया गया है, यह अच्छी पहल है, लेकिन आंगनबाड़ी के छोटे बच्चों को भी दूध दिया जाए तो बेहतर रहेगा। आंगनबाड़ी के बच्चे तो स्कूल वालों से छोटे होते हैं, ऐसे में आंगनबाड़ी के बच्चों को दूध पहले मिलना चाहिए। दूध की गुणवत्ता भी बेहतर रहे।
राजन चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता, झुंझुनूं


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