
राजस्थान में इस सरकारी अस्पताल ने हासिल की दूसरी रैंक , 83 फीसदी नवजातों को मिला बेहतर इलाज
झुंझुनूं.
राजकीय बीडीके अस्पताल में भर्ती 83 फीसदी नवजातों को बेहतर इलाज मिला है। इसका खुलासा चिकित्सा विभाग की सरवाइवल एट द टाइम ऑफ डिस्चार्ज की दर में हुआ है। जिसमें बताया कि पूरा इलाज करने के बाद चिकित्सकों ने छूट्टी दी है। नवजातों को बेहतर सुविधाएं देने के कारण प्रदेश के 33 जिलों में से झुंझुनूं दूसरे स्थान पर है, वहीं चित्तौडगढ़़ प्रथम पायदान पर रहा है। त्रैमासिक दर में चार पैरामीटर तय किए हैं। जिसमें अस्पताल में नवजात शिशुओं के इलाज की जांच-परख के बाद में रैंकिग तय की जाती है।रिपोर्ट में बताया कि जिला अस्पताल में नवजातों को समुचित इलाज मिल रहा है।सेवाओं में सिरोही तीसरे व बाडमेर चौथे स्थान पर है।
ये अंतिम चार में
रिपोर्ट के मुताबिक भतरपुर, बांसवाडा, हनुमानमगढ़ व पाली जिले अंतिम चार पायदानों में शामिल है।यहां जिला अस्पतालों में चिकित्सकों के नवजातों को रैफर करने या परिजनों के खुद अस्पताल से बिना बताए चले जाते हैं, या उनकी मौत होने की बात सामने आई है।
इनका कहना है
इस सफलता के पीछे पूरी टीम का सहयोग रहा है, सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा लक्ष्य जिला अस्पताल को प्रथम स्थान पर लाने का है। -डॉ. वीडी बाजिया, शिशु रोग विशेषज्ञ राजकीय बीडीके अस्पताल।
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झूठा मुकदमा दर्ज कराने पर जुर्माना
झुंझुनूं. न्यायालय ने झूठा मुकदमा दर्ज कराने एक जने पर पांच सौ रुपए का जुर्माना लगाया है। सीआई सदर शंकरलाल छाबा ने बताया कि दो सितम्बर 2016 को सिरियासर कला निवासी दयानंद सिंह ने रिपोर्ट में बताया कि उसके पास एक अच्छी नस्ल का कुत्ता था। जिसे पड़ौसी संदीप पकड़ कर बांध लिया।छुड़वाने के लिए गया तो मारपीट की।इस पर जांच एचसी रघुवीर सिंह को सौंपी गई।अनुसंधान में मामला झूठा पाया जाने पर न्यायालय ने दयानंद सिंह पर जुर्माना लगाया।
Published on:
03 Jun 2018 06:57 pm

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