
झुंझुनूं . घरों में सब्जी के उपयोग के लिए उगाई जाने वाली फूलगोभी की फसल अब उदयपुरवाटी के पहाड़ी क्षेत्र के गांवों में मुख्य फसल का रूप लेती जा रही है। खेती-बाड़ी से जुड़े एडवोकेट मोतीलाल सैनी उदयपुरवाटी ने जानकारी देते हुए बताया कि कभी जौ, गेंहू व बाजरे की फसल पर आश्रित किसान अब फूल गोभी की खेती से मोटा मुनाफा कमा रहे है । उदयपुरवाटी उपखण्ड मुख्यालय व आस - पास के गांवों के साथ अब उपखण्ड के जहाज, राजीवपुरा, मणकसास व खेतड़ी, नवलगढ़ उपखण्ड के गांवों में भी बड़े पैमाने पर फूल गोभी की खेती हो रही है।
यह है आमदनी का रैसा
फूल गोभी की खेती से जुड़े किसान भागीरथ मल सैनी, शंकरलाल सैनी, श्रीराम सैनी, श्यामलाल सैनी, छोटूराम सैनी, श्रीचन्द सैनी,सोना देवी,सविता देवी,सुमन देवी ने बताया कि दो हजार से तीन हजार में एक क्यारी बीज के रूप में गोभी की पौध आती है। एक क्यारी की पौध एक बीघा में पौध रौपण किया जाता है। 60 दिन में तैयार होने वाली यह फसल के बारे मे किसान मोतीलाल सैनी, गौरू राम सैनी,फूल चन्द ने बताया कि एक बीघा में आठ हजार तक का खर्च आता है। जिससे किसान एक बीघा में लगभग बीस सें तीस क्विटंल गोभी तैयार करता है। जिसकी मंडियों में गोभी की फसल शुरू होने पर 50 से 40 रू प्रतिकिलो के हिसाब से व बाद में 30 से 10 रू प्रति किलो की आय होती है।
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जिले में फूल गोभी का रकबा प्रति वर्ष बढ़ रहा है। जहां पहले गांवों मे दो - चार क्यारी सब्जी बोई जाती थी । अब बीघा के हिसाब से बुआई होती है। कृषि की नई तकनीक आने पर किसानों का रूझान अब फसलों की बजाए फल व सब्जियों की और बढ़ा है। इनमें लागत कम मुनाफा अधिक होता है।
शीशराम जाखड़ ,सहायक निदेशक [उद्यान] झुंझुनूं।
Published on:
05 Oct 2023 11:07 am
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