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दिल्ली की फाइलों में अटक गए झुंझुनूं के चिंकारा और कृष्ण मृग

विभाग ने चिंकारा के लिए बीड़ में धामण घास, बेर, रोहिड़ा एवं खेजड़ी के पौधे मुख्य रूप से लगवा दिए हैं। धामण घास एवं बेर चिंकारा का मुख्य भोजन है। इसके लिए ग्रामीणों का भी काफी सहयोग लिया जा रहा है।

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दिल्ली की फाइलों में अटक गए झुंझुनूं के चिंकारा और कृष्ण मृग

दिल्ली की फाइलों में अटक गए झुंझुनूं के चिंकारा और कृष्ण मृग

पत्रिका एक्सक्लूसिव

राजेश शर्मा
झुंझुनूं. शहर और बगड़ के बीच स्थित बीड़ में कृष्ण मृग और चिंकारा लाने की फाइल दिल्ली में अटक गई है। प्रगति विहार नई दिल्ली स्थित सेंट्रल जू अथोरिटी से हरी झंडी नहीं मिलने के कारण दूसरे जिलों से काले हरिण और चिंकारा नहीं लाए जा रहे।
बीड़ को कंजर्वेशन रिजर्व के रूप मेें विकसित किया जा रहा है। इसकी स्वीकृति दो वर्ष पहले हुई थी। इसमें दस वर्ष के दौरान 27 करोड़ रुपए के कार्य किए जाएंगे। यहां पहले चरण में सौ काले हिरण(कृष्ण मृग) और सौ चिंकारा लाए जाएंगे। इसके लिए वन विभाग झुंझुनूं ने पूरा प्रस्ताव बनाकर मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक राजस्थान जयपुर को भिजवा दिया है। उन्होंने यह प्रस्ताव सेंट्रल जू अथॉरिटी को भिजवा दिया है। लेकिन वहां से हरी झंडी नहीं मिलने के कारण कृष्ण मृग और चिंकारा को यहां नहीं लाया जा रहा।

कैफेटेरिया बनेगा, ग्रामीण उत्पाद मिलेंगे

बीड़ में वन विभाग की चौकी के समीप ही एक कैफेटेरिया विकसित करने की भी योजना है। यहां स्वयं सहायता समूहों की ओर से गांवों में बनाए जाने वाली चमड़े की जूतियां, मुड्डे, अचार, फर्नीचर, हैंडीक्राफ्ट जैसे उत्पाद बिक्री के लिए रखे जाएंगे। बीड़ वन क्षेत्र में मुख्यत नीलगाय एवं राष्ट्रीय पक्षी मोर बहुतायत में हैं। चिंकारा आने से यह वन्य क्षेत्र पर्यटन क्षेत्र के रूप में भी विकसित होगा। विभाग ने चिंकारा के लिए बीड़ में धामण घास, बेर, रोहिड़ा एवं खेजड़ी के पौधे मुख्य रूप से लगवा दिए हैं। धामण घास एवं बेर चिंकारा का मुख्य भोजन है। इसके लिए ग्रामीणों का भी काफी सहयोग लिया जा रहा है।

#chinkara in jhunjhunu beed
चिंकारा के लिए बनेंगे तीन अंडरपास
वन विभाग ने यहां की वनस्पति, खासतौर पर विलुप्त हो रही प्रजाति के जाळ को बचाने और इसके विस्तार के लिए काम शुरू किया है। बीड़ राजमार्ग के दोनों तरफ फैला हुआ है। ऐसे में कोई जीव सड़क पार करते समय वाहनों की चपेट में न आ जाएं, इसलिए इस मार्ग चार जगह अंडरपास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही इस पूरे क्षेत्र की करीब सात फीट ऊंचे लोहे के एंगल पर कंटीले तार व जालियां लगाई जा चुकी हैं।

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जानिए क्या है सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी

सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी का मुख्य उद्देश्य भारत में जानवरों के रख-रखाव और स्वास्थ्य देखभाल के लिए न्यूनतम मानकों तथा मानदंडों को लागू करना है। सांविधिक निकाय के रूप में इसकी स्थापना वर्ष 1992 में की गई थी। वर्ष 1991 में इस निकाय की स्थापना के लिए वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम को संशोधित किया गया था। इस प्राधिकरण का मुख्य लक्ष्य देश की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण में राष्ट्रीय प्रयास को और मज़बूत करना है।

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फैक्ट फाइल
क्षेत्रफल 1047 हैक्टेयर
काले हिरण आएंगे 100
चिंकारा आएंगे 100
अभी सबसे ज्यादा पक्षी मोर
सबसे ज्यादा पेड़ जाळ
सबसे ज्यादा पशु नील गाय
कुल प्रोजेक्ट 27 करोड़


इनका कहना है
बीड़ में 100 कृष्ण मृग और 100 ङ्क्षचकारा लाए जाएंगे। इसका पूरा प्रस्ताव बनाकर जयपुर स्थित मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को भेज दिया गया है। उन्होंने मंजूरी के लिए दिल्ली स्थित सेंट्रल जू अथॉरिटी से अनुमति मांगी है। वहां से अनुमति मिलते ही वन्य जीवों को लाने का कार्य शुरू हो जाएगा।
-राजेन्द्र कुमार हुड्डा, उप वन संरक्षक, झुंझुनूं

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झुंझनूं और फतेहपुर बीड़ के बारे में जो भी प्रस्ताव दिल्ली गए हैं। वे सभी मंजूर करवा दिए हैं। चिंकारा और काले हिरणों का मामला भी दिखवा लूंगा। या तो इसे मंजूरी मिल गई होगी, अगर कहीं अटकी है तो जल्द ही मंजूरी दिलवा दी जाएगी।
-नरेन्द्र कुमार, सांसद झुंझुनूं


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