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राजस्थान के सूरजगढ़ में ऐसा अस्पताल जहां नाड़ी देखकर होता उपचार

अधिकतर औषधियांं औषधालय में ही तैयार की जाती है। इसके लिए दो कर्मचारी अलग से कार्यरत हैं। इनके अलावा भी पर्ची काटने वाले व अन्य कर्मचारी यहां कार्यरत हैं।

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राजस्थान के सूरजगढ़ में ऐसा अस्पताल जहां नाड़ी देखकर होता उपचार

राजस्थान के सूरजगढ़ में ऐसा अस्पताल जहां नाड़ी देखकर होता उपचार


लक्ष्मीकांत शर्मा
सूरजगढ़. राजस्थान के झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ कस्बे में स्थित दुर्गादेवी डालमिया दातव्य औषधालय में अभी भी नाड़ी देखकर उपचार किया जाता है। खास बात यह है कि 75 वर्ष पुराने इस अस्पताल में ना परामर्श के लिए कोई शुल्क लिया जाता है ना ही दवा के लिए राशि खर्च करनी पड़ती है। यहां सब कुछ निशुल्क है।
औषधायल की स्थापना करीब 75 वर्ष पहले सेठ रामकृष्ण डालमिया की पत्नी दुर्गा देवी ने की। उन्हीं के नाम से यह अस्पताल है। पूर्व में इसका संचालन रामकृष्ण डालमिया के अनुज सेठ जयदयाल डालमिया ने किया। अब इसका संचालन डालमिया सेवा ट्रस्ट नई दिल्ली की ओर से किया जा रहा है।

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इसके प्रबन्ध ट्रस्टी विष्णुहरि डालमिया भी रहे हैं। जो कि विश्व हिन्दू परिषद् के अन्तरराष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके। वर्तमान में इसके प्रबन्ध ट्रस्टी रघुहरि डालमिया हैं।

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देश के प्रसिद्ध औद्योगिक घराने डालमिया की ओर से स्थापित इस औषधालय के प्रधान वैद्य रहे मदनलाल पुष्करणा आयुर्वेदाचार्य (एमए.एमएस) थे। जिन्होंने सन् 1948 में इस औषधालय के प्रधान वैद्य का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने करीब 55 वर्षों तक अपनी सेवा दी। वर्तमान में मदनलाल पुष्करणा के पुत्र अरुण पुष्करणा प्रधान वैद्य के रूप में कार्यरत हैं। मरीज को सुबह भूखे पेट ही जांच करवानी होती है। यहंा दिखाने के लिए आम से लेकर खास तक सभी आते हैं।

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औषधालय में ही तैयार की जाती औषधियां
अधिकतर औषधियांं औषधालय में ही तैयार की जाती है। इसके लिए दो कर्मचारी अलग से कार्यरत हैं। इनके अलावा भी पर्ची काटने वाले व अन्य कर्मचारी यहां कार्यरत हैं। औषधालय की विशेषता यह है कि इसमें किसी विशेष बीमारी का ही इलाज नहीं किया जाता अपितु हर प्रकार की शारीरिक बीमारी का इलाज यहां उपलब्ध है। यहां दूर-दूर से आंत्रिक ज्वर (मोतीझरा) अपस्मार (मिर्गी) लकवा, पीलिया जैसी घातक बीमारियों का इलाज कराने के लिए भी रोगी आते हैं।

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प्रतिवर्ष 60 हजार रोगी आ रहे
प्रतिवर्ष लगभग 60 हजार रोगी औषधालय से लाभान्वित होते है, यहां स्थानीय एवं आस-पास के ग्रामीण अंचलों में रोगियों के अलावा हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र एवं असम तक के रोगी भी इलाज के लिए पहुंचते हैं।

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परोपकारी कार्य
यह औषधालय कई सालों से चल रहा है। लोग इसका भरपूर फायदा भी उठा रहे हैं। अच्छी सोच के साथ शुरू किए गए ऐसे धर्मार्थ एवं परोपकारी कार्य से जनता को आयुर्वेद के जरिए स्वास्थ्य लाभ भी मिल रहा है।
डॉ. शैलेश कुमार (बीसीएमओ) सूरजगढ़