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शिक्षा का बंटाधार, जिनके आए 0 अंक, वे बच्चों को पढ़ाएंगे

आरपीएससी ने गत वर्ष सैकंड ग्रेड के सफल अभ्यर्थियों की लिस्ट जारी की थी। जिसमें बहुत से अभ्यर्थियों ने पदभार ग्रहण नहीं किया। ऐसे में आयोग ने वेटिंग में चल रहे अभ्यथियों की पिकअप लिस्ट जारी की। जिसमें अंग्र्रेजी, गणित, विज्ञान की मेरिट लिस्ट में ऐसे अभ्यर्थियों को भी जगह मिली है, जिनके सब्जेक्ट में बहुत ही कम अंक आए हैं। आयोग ने तीनों विषयों के कुल 349 अभ्यर्थियों की लिस्ट जारी की।

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शिक्षा का बंटाधार, जिनके आए 0 अंक, वे बच्चों को पढ़ाएंगे

शिक्षा का बंटाधार, जिनके आए 0 अंक, वे बच्चों को पढ़ाएंगे

सुरेंद्र डैला.चिड़ावा (झुंझुनूं). अगले कुछ वर्षों में सुधार नहीं हुआ तो राजस्थान के सरकारी विद्यालयों का बंटाधार होना तय है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी), अजमेर ने सैकंड ग्रेड भर्ती परीक्षा-2018 के प्रतिक्षार्थियों की चयन सूची जारी की है। जिसमें कुछ विषयों के अध्यापक तो ऐसे शामिल हुए हैं, जिनके विषय में माइनस में अंक आए हैं। यानी कि जिस विषयों को पढ़ाएंगे, उसी में शून्य से कम अंक प्राप्त हुए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि संबंधित विषय में ही अंक नहीं ला पाए तो विद्यार्थियों को कैसे पढ़ाएंगे?
आरपीएससी ने गत वर्ष सैकंड ग्रेड के सफल अभ्यर्थियों की लिस्ट जारी की थी। जिसमें बहुत से अभ्यर्थियों ने पदभार ग्रहण नहीं किया। ऐसे में आयोग ने वेटिंग में चल रहे अभ्यथियों की पिकअप लिस्ट जारी की। जिसमें अंग्र्रेजी, गणित, विज्ञान की मेरिट लिस्ट में ऐसे अभ्यर्थियों को भी जगह मिली है, जिनके सब्जेक्ट में बहुत ही कम अंक आए हैं। आयोग ने तीनों विषयों के कुल 349 अभ्यर्थियों की लिस्ट जारी की।

#Education in rajasthan

तीन विषयों के 349 अभ्यर्थी-

आरपीएससी ने अंग्रेजी, गणित और विज्ञान की फाइनल मेरिट लिस्ट जारी की। जिसमें गणित के 91, विज्ञान के 87, हिंदी के 6 8 और अंग्रेजी के 171 अभ्यर्थी शामिल हैं। वहीं आयोग अब जल्द ही अन्य विषयाध्यापकों की पिकअप लिस्ट जारी करेगा।
तीनों विषयों की फाइनल लिस्ट में ऐसे अभ्यथियों की भरमार है, जिसने पांच सौ में से महज 60-70 से कम अंक हासिल किए। कुछ अभ्यर्थियों के तो महज 20 ही अंक आए हैं।

केस-01

मेरिट लिस्ट में शामिल एक अभ्यर्थी के अंग्रेजी में तीन सौ में से माइनस 6.85 अंक आए। जीके में 27.33 तथा कुल 20.48 अंक प्राप्त हुए। सब्जेक्ट में माइनस में अंक होकर भी वह अध्यापिका बनी है।

केस-02

एक अभ्यर्थी के खुद के विषय में 33.33 अंक आए। मगर जनरल नॉलेज में दो सौ में से माइनस 4.67 अंक प्राप्त हुए। उसके कुल 28.66 अंक बने। वह भी अध्यापिका बन गई।

केस-03

अंग्रेजी विषय के ही एक युवक के खुद के विषय में 32.19 अंक आए। वहीं जीके (सामान्य ज्ञान) में महज 0.67 अंक आए। यह युवक अब सरकारी स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाएगा।

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इनका कहना है-
आरपीएससी की सूची में शामिल माइनस मार्किंग के अभ्यर्थियों को पदस्थापित किया जाता है तो शिक्षा की गुणवत्ता कमजोर होगी। सरकार को चाहिए की मजबूत शिक्षा नीति को लागू कर चयन के लिए न्यूनतम अंक निर्धारण करना चाहिए।
-राजकुमार मूंड, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, शिक्षक संघ (सियाराम)