
लिवर, किडनी जैसी जांचें बंद, निजी लैब संचालकों की हो रही चांदी
झुंझुनूं. जिले के सबसे बड़े राजकीय भगवानदास खेतान (बीडीके) अस्पताल में इन दिनों मरीज अव्यवस्था की मार झेलने को मजबूर हैं। शहर व आसपास के गांवों से अस्पताल में आने वाले मरीजों को लिवर, किडनी सहित कई जांचों के लिए निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि पिछले कई दिनों से अस्पताल में ऑटोमेटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन खराब पड़ी है। इस कारण बायोकेमिस्ट्री से संबंधित जांचें नहीं हो पा रही है। अस्पताल प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। मजबूरन मरीजों को बाहर से निजी लैब में जांच करानी पड़ रही है। इसका फायदा उठाकर प्राइवेट लैब संचालक मनमाने रुपए वसूलकर चांदी कूट रहे हैं।
बैकअप प्लान नहीं, डॉक्टरों को मैसेज भेजकर झाड़ लिया पल्ला
अस्पताल प्रबंधन के पास किसी भी प्रकार की मशीनरी के गड़बड़ हो जाने के बाद कोई बैकअप प्लान नहीं है। एनालाइजर के खराब होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने कार्यरत डॉक्टरों को मैसेज कर रखा है कि बायोकेमिस्ट्री पूर्णत: स्वचालित एनालाइजर तकनीकी समस्याओं के कारण वर्तमान में काम नहीं कर रहा है। इसलिए हम बायोकेमिस्ट्री परीक्षण करने में असमर्थ हैं।
बाहर लग रहे 150-1000 रुपए
जानकारों के अनुसार बायोकेमिस्ट्री से जुड़ी उक्त जांचें बाहर से करवाने पर डेढ़ सौ रुपए से लेकर एक हजार रुपए तक लगते हैं। अस्पताल की जांचें बंद होने से निजी लैब संचालक चांदी कूट रहे हैं। मरीजों को जानकारी नहीं होने की वजह से प्राइवेट लैब में शुल्क वसूली के नियमों की भी पालना नहीं की जा रही।
500-700 जांच होती रोजाना
बीडीके अस्पताल में रोजाना औसतन पांच सौ से सात सौ मरीजों की बॉयोकेमिस्ट्री से संबंधित जांचें होती हैं। इसके अलावा सौ से सवा सौ रोगी रोजाना भर्ती रहते हैं। इनकी जांचे भी रोजाना या फिर एकांतर होती रहती हैं।
प्लेटलेट्स भी निजी ब्लड बैंक से
इन दिनों डेंगू से पीड़ित रोगियों की अस्पतालों में कतार लग रही है। बीडीके अस्पताल में लाखों रुपए कीमत की ब्लड सेपरेशन यूनिट को भी आज तक चालू नहीं किया गया है। इस कारण मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए भी निजी अस्पताल के ब्लड बैंक जाना पड़ रहा है।
Published on:
08 Sept 2023 11:32 pm
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