14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

झुंझुनूं के महनसर में मशहूर हवेली ‘सोने की दुकान’ को संरक्षण की दरकार

goldshopnews : महनसर को सोने की दुकान, मंदिर, गढ़ सहित अन्य दर्शनीय स्थलों की विशेषता के चलते सरकार ने इसे हेरिटेज सिटी में शामिल तो कर लिया गया लेकिन उसके मुताबिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया। महनसर में सैलानियों को आने में परेशानी ना हो इसके लिए सड़कों का विस्तार, धरोहर की भव्यता का विश्व मानचित्र में व्यापक प्रचार प्रसार तथा हैरीटेज योजना के तहत विदेशी सैलानियों के लिए खास इंतजाम करने की जरूरत है।

3 min read
Google source verification
झुंझुनूं के महनसर में मशहूर हवेली ‘सोने की दुकान’ को संरक्षण की दरकार

झुंझुनूं के महनसर में मशहूर हवेली ‘सोने की दुकान’ को संरक्षण की दरकार

कुंजबिहारी बिरमीवाला@बिसाऊ

शेखावाटी की स्थापत्य कला यूं तो हर सैलानी को अपनी तरफ आवाज देती दिखाई देती है, दिल के झरोखें सी झांकती हवेलियां तथा उनमें बने भित्ति चित्रों को अपनी स्मृतियों में बांधने के लिए देशी विदेशी सैलानी जिले के भ्रमण पर साल भर आते रहते हैं। पर्यटन स्थलों में सबसे अनूठी महनसर की सोने की दुकान ने पूरे जिले को देश दुनिया में अलग पहचान दी है। दरअसल गांव के ह्रदय स्थल में पोद्दार परिवार की एक दुकान है। इस दुकान के चारों तरफ सोने की परत है। दुकान में सोने से उकेरे भित्ति चित्र गवाह है कि शेखावाटी सेठों की जननी है। सोने की दुकान बाहर से एक हवली के रूप में नजर आती है, वहीं अंदरुनी हिस्से की नायाब कलाकारी को देख पर्यटक अभिभूत नजर आते हैं। हालांकि कोरोना के बाद विदेशी सैलानियों की संख्या में कमी आई है। लेकिन देश के अलग-अलग कोने से मंडावा आदि जगहों पर आने वाले परदेसी सोने की दुकान देखने अवश्य आते हैं।

श्रीराम तथा कृष्णलीला है आकर्षण का केन्द्र

दुकान के अंदर का प्रमुख हिस्सा तीन भागों में है। जहां काष्ठकला का बेजोड़ नमूना देखने को मिलता है। सोने से बने भित्ति चित्र इसे खास बनाते हैं। दक्षिण में पूरी रामायण के स्वर्ण भित्ति चित्र हैं। दूसरे व मध्य भाग में 24 अवतारों के चित्र हैं तथा तीसरे भाग में भगवान कृष्ण की विविध लीला का चित्रण है। इन भित्ति चित्रों पर सोने की चमक ऐसी है कि चित्र सालों साल बाद भी मुंह बोलते दिखाई देते हैं।

बारिश के पानी से पॉलिश उतरी

दुकान के ढोले में सोने से निर्मित लंका के चित्र के एक हिस्से पर छत से आए बरसाती पानी के आने से सोने की पॉलिश को कुछ साल पहले नुकसान हुआ है। चित्रकारी वाली एक तरफ की दीवार भी कुछ क्षतिग्रस्त हुई है। अब पोद्दार परिवार इस एतिहासिक धरोहर को सहेजने के लिए और ज्यादा संजीदा हो गया। नियमित देखभाल के साथ ही भित्ति चित्रों को संरक्षित रखने के लिए आगंतुक सैलानियों से दीवार को स्पर्श तक नहीं करने की अपील की जाती है।

सोने की चमक आज भी बरकरार

दुकान में सोने के इस्तेमाल से निर्मित हस्तकला के संरक्षण के लिए पोद्दार परिवार संजीदा है। स्वर्णआभा कम ना हो इसके लिए दुकान में कहीं भी विद्युत फिटिंग या कृत्रिम रोशनी की व्यवस्था नहीं है। भित्ति चित्रों की चमक आज भी इस कदर बरकरार है कि दुकान के तीनों दरवाजों को एक साथ खोलने पर सोने की चित्रकारी सूरज की रोशनी से जगमग हो जाती है।


हेरिटेज सिटी में शामिल लेकिन विकास नहीं

महनसर को सोने की दुकान, मंदिर, गढ़ सहित अन्य दर्शनीय स्थलों की विशेषता के चलते सरकार ने इसे हेरिटेज सिटी में शामिल तो कर लिया गया लेकिन उसके मुताबिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया। कुलदीप पोद्दार कहते हैं कि महनसर में सैलानियों को आने में परेशानी ना हो इसके लिए सड़कों का विस्तार, धरोहर की भव्यता का विश्व मानचित्र में व्यापक प्रचार प्रसार तथा हैरीटेज योजना के तहत विदेशी सैलानियों के लिए खास इंतजाम करने की जरूरत है।


दुकान से होता था विदेशों में कारोबार

पोद्दार परिवार की सातवीं पीढी के सदस्य कुलदीप पोद्दार बताते हैं कि सेठ हरकंठराय पोद्दार इसी दुकान से करीब 190 साल पहले देश व विदेश में अपना कारोबार चलाते थे। सौ गुणा बीस फीट के मुख्य हिस्से में सोने की चित्रकारी की हुई है। इस दुकान से हुंडी तथा विदेशी जहाज से आने वाले कीमती सामान को बीमित करने का काम होता था। दुकान के अंदर वाले हिस्से में दो-दो कमरे बने हुए हैं।


सहेजने के लिए करने होंगे समन्वित प्रयास

अपनी स्थापत्य कला से आकर्षित करने वाली सोने की दुकान की वास्तविक स्थिति को बनाए रखने के लिए पोद्दार परिवार के साथ पर्यटन विभाग को समन्वित प्रयास करने होंगे। सैलानियों का मानना है कि ऐसी नायाब धरोहर को जीवित बनाए रखना बहुत जरूरी है, फीके हुए रंगों को फिर से उसी रूप में लाना तो मुश्किल दिखाई देता है लेकिन जो मौजूद है, उसका संरक्षण किया जाना चाहिए।