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राजस्थान में इस जगह कौन मरवा रहा है मोर व तीतर?

स्थानीय लोगों का कहना है ​शिकारी इतने मोरों को क्यों मार रहे थे, कहीं इनके मांस की सप्लाई बड़े होटलों में तो नहीं हो रही?

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खेतड़ी के निकट प​क्षियों से भरे बोरे व कार्रवाई करने वाली टीम।

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में आए दिन बड़ी संख्या में प​क्षियों का ​शिकार हो रहा है। इन प​क्षियों को कहां ले जाया जा रहा है। कब से ले जाया जा रहा है। इस गिरोह में कौन कौन शामिल यह अब जांच का विषय बनता जा रहा है।जिले में 12 राष्ट्रीय पक्षी मोर सहित 54 पक्षियों का शिकार कर लिया गया। शिकारी पक्षियों के शवों को बोरों में भरकर ले जा रहे थे। सूचना पर वन विभाग की टीम ने नाकाबंदी की तो मोटर साइकिल पर सवार शिकारी बोरों को वहीं पटक कर भाग गए। बोरों में से 11 मोर के बच्चों के शव, 1 मोर, 3 काला तीतर (जिले का शुभंकर), 36 तीतर व 3 कमेडी के शव बरामद किए गए हैं।

खेतड़ी के क्षेत्रीय वन अधिकारी मुकेश कुमार मीणा ने बताया कि वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली कि बुहाना की तरफ से कुछ शिकारी पक्षियों का शिकार कर खरखड़ा की तरफ गए हैं। सूचना पर विभाग की टीम ने खरखड़ा -बांकोटी सड़क मार्ग पर नाकेबंदी की। नाकाबंदी के दौरान टीम को देखकर मोटर साइकिल पर सवार आरोपी 2 बोरों व 1 जाल को वहीं फेंक कर भाग गए।

54 पक्षियों के शवों को ठूंस-ठूंस कर भर रखा था

वन विभाग की टीम ने बोरों को खोलकर देखा तो उसमें 54 पक्षियों के शवों को ठूंस-ठूंस कर भर रखा था। टीम ने बोरों व पक्षी पकड़ने के जाल को जब्त कर लिया। वन्य जीव अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश की जा रही है। पक्षियों के शवों का पशु चिकित्सकों के मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। कार्रवाई करने वाली टीम में क्षेत्रीय वन अधिकारी मुकेश कुमार मीणा के नेतृत्व में वनपाल शाहरुख खान, सहायक वनपाल सत्यवान पूनिया, सुमेर सिंह, जितेंद्र सिंह, महिपाल रणवा ,ओम प्रकाश गुर्जर व जयपाल सिंह शामिल थे।

कहीं बड़ा गिरोह तो शामिल नहीं ?

स्थानीय लोगों का कहना है ​शिकारी इतने मोरों को क्यों मार रहे थे, इसकी जांच होनी चाहिए। क्योंकि खुद के लिए इतने जानवरों को यह अकेले नहीं मार सकते । कहीं इनके मांस की सप्लाई बड़े होटलों में तो नहीं हो रही? क्या सरकार इसकी जांच करवाएगी? पर्दे के पीछे गिरोह का पकड़ेगी? पहले भी कई बार तीतर व मोर ​शिकारियों के पास मिलते हैं लेकिन जांच में पूरा सच सामने क्यों नहीं आ रहा?