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देश की अनूठी दरगाह, यहां आ चुके पीएम, दिवाली पर जलते हैं भाईचारे के दीप

गंगा जमुनी तहजीब क्या है उसका श्रेष्ठ उदाहरण बनी हुई है। यहां दिवाली पर दीप प्रज्जवलित होते हैं तो उर्स पर कव्वाली के साथ भजन भी होते हैं। देश के दूसरे हिस्सों में ऐसी दरगाह मिलना मुश्किल है। जहां के गद्दीनशीन मंदिर के वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि होते हैं

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देश की अनूठी दरगाह, यहां आ चुके पीएम, दिवाली पर जलते हैं भाईचारे के दीप

देश की अनूठी दरगाह, यहां आ चुके पीएम, दिवाली पर जलते हैं भाईचारे के दीप

राजेश शर्मा

झुंझुनूं. यह राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश की अनूठी दरगाह है...। अनूठी भी अनेक प्रकार से...। ऐसी दरगाह जो पिछले कई वर्ष से बरसात के पानी की एक -एक बूंद बचा रही है। भाईचारे का संदेश दे रही है। गंगा जमुनी तहजीब क्या है उसका श्रेष्ठ उदाहरण बनी हुई है। यहां दिवाली पर दीप प्रज्जवलित होते हैं तो उर्स पर कव्वाली के साथ भजन भी होते हैं। देश के दूसरे हिस्सों में ऐसी दरगाह मिलना मुश्किल है। हजरत कमरुद्दीन शाह दरगाह के गद्दीनशीन मंदिर के वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि होते हैं तो ईद के चांद का दीदार शिव मंदिर की छत से होता है। इस गंगा जमुनी तहजीब का ही असर था कि देश के बंटवारे के समय भी यहां शांति बनी रही। जो आज तक जारी है। गद्दीनशीन एजाज नबी ने बताया कि सबसे पहले यहां मस्जिद, कुएं व हुजरा का निर्माण किया गया। जब इसकी नींव रखी गई तब यहां घनघोर जंगल था। पहाड़ी की तलहटी में बनी इस दरगाह की जमीन की काफी ऊंचाई है। पानी ले जाना आसान काम नहीं था। ऐसे में पहाड़ की ढलान पर दरगाह के पीछे दो बड़े एनीकट का निर्माण किया गया।

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इसके अलावा दो छोटे व एक बड़े कुंड का निर्माण दरगाह परिसर में किया गया। तीनों कुंडों की बनावट व ढलान इस प्रकार है कि बरसात का पूरा पानी इन्हीं कुंडों में आता है। जब ऊपर बने दो छोटे कुंड भर जाते हैं तो नीचे बने विशाल कुंड में पानी आता है। वर्तमान में कुंड से पानी का उपयोग बागवानी में किया जा रहा है। इसके लिए बड़ी मोटर व पाइप लाइन फिट की हुई है। बागवानी में गुलाब, गुलदाउदी, गेंदा, चम्पा, चमेली सहित अनेक प्रकार के फूलदार व फलदार पौधे लगे हुए हैं।

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नूंआ गांव के रहने वाले थे हजरत कमरुद्दीन

हजरत कमरुद्दीन शाह का जन्म राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नूआं गांव में सरदार खां के घर पर हुआ। उनका निकाह सिरियासर गांव में हुआ। उनके बेटी हुई तो घर में खुशियंा मनाई गई, लेकिन ऊपर वाले ने यह खुशियां ज्यादा दिन नहीं दी। कुछ दिन बाद फूल सी बेटी चल बसी। यह सदमा कमरुद्दीन शाह की पत्नी नहीं झेल सकी और कुछ दिन बाद वह भी चल बसी। कुछ समय बाद कमरुद्दीन शाह के पिता का भी इंतकाल हो गया। ऐसे में छोटी सी उम्र में गहरे सदमे लगे। इसके बाद नौकरी के लिए बिसाऊ गढ़ में पहुंचे। वहां पहरेदार की नौकरी की। लेकिन नौकरी में उनका मन नहीं लगता तो वे इबादत में रम जाते। कुछ समय बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी। बिसाऊ में इस दौरान उनकी दोस्ती संत चंचलनाथ से हुई। जो उन्हीं के हमउम्र थे। चंचलनाथ से सलाह लेकर वे बिसाऊ छोड़कर झुंझुनूं के निकट इस्लामपुर आ गए।

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यहां उनके सूफीयान रंग ऐसे चढ़ा कि उन्होंने जीवन को इबादत व दूसरों का जीवन सुधारने में लगा लिया। धर्म के ऊपर मानवता को रखा। उन्होंने संदेश दिया है धर्म बाद में और मानवता पहले है। उनके अनुयायी भी उनके संदेश की पालना कर रहे हैं। कुछ दिनों बाद इस्लामपुर से झुंझुनूं आ गए। यहीं पर इबादत में लीन हो गए। इसके बाद बिसाऊ वाले उनके परम मित्र चंचलनाथ भी यहां आ गए। उन्होंने दरगाह के ठीक सामने करीब दो-तीन किलोमीटर की दूरी टीले पर अपना स्थान बना दिया।

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मंदिर व दरगाह के बीच गुप्त सुरंग
चंचलनाथ व हजरत कमरुद्दीन शाह आपसे में गहरे मित्र थे। उनकी दोस्ती की मिसाल पूरे शेखावाटी में दी जाती है। उन्होंने मंदिर व दरगाह के बीच में सुरंग बनाई। यह सुरंग गुदड़ी बाजार होते हुए टीले पर जाती है। दोनों इस सुरंग के माध्यम से एक दूसरे के स्थान पर पहुंचते थे। यह सुरंग आज भी कायम है।

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ईरानी मुगल व राजपूत शैली में निर्माण, 22 वर्ष लगे
गद्दीनशीन एजाज नबी ने बताया कि दरगाह का निर्माण हजरत कमरुद्दीन शाह ने शुरू करवाया। इसे विस्तार दिया हजरत हादी शाह ने वर्ष 1857 में इसका निर्माण शुरू हुआ। इसे पूरा होने में करीब 22 वर्ष लगे। इसके निर्माण की शैली ईरानी मुगल व राजपूत शैली है। दरगाह काफी ऊंचाई है। इसका विशाल दरवाजा दूर से ही दिखाई देता है।

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बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग, पीएम तक आ चुके

नगर परिषद के पूर्व सभापति खालिद हुसैन ने बताया कि दरगाह परिसर में बॉलीवुड की अनेक फिल्मों की शूटिंग हो चुकी। यहां पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, राज्यपाल सतपाल मलिक, बलिराम भगत, पूर्व मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित अनेक केन्द्रीय मंत्री, अधिकारी व बॉलीवुड के सितारे आ चुके।

अब तक यह रहे गद्दीनशीन
-हजरत कमरुद्दीन शाह
-हजरत हादी शाह
-हजरत इलाही बख्श
-हजरत अब्बदुल्लेह शाह
-हजरत फतेह मोहम्मद शाह
-हजरत खादिम हुसैन शाह
-एजाज नबी 1 जनवरी 98 से अब तक
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