
राजस्थान का अनूठा गांव, जहां मुर्गी पीती है गाय का दूध
राजेश शर्मा/ महिपाल मील
झुंझुनूं/मंडावा. यह बात तो आपने सभी ने सुनी होगी कि मुर्गी दाना खाती है। पानी पीती है। अंडे भी देती है। लेकिन राजस्थान के झुंझुनूं जिले में वाहिदपुरा अनूठा गांव है। यहां की करीब पांच हजार से ज्यादा मुर्गियों का जायका इन दिनों बदला हुआ है। वे अब दाने के साथ दूध भी पी रही है। दूध भी शुद्ध है गाय का। दोनों समय यह मुर्गियां गाय का शुद्ध दूध पी रही है।
वाहिदपुरा गांव में संदीप कुमार पोल्ट्री फार्म की 5000 मुर्गियों को प्रतिदिन गायों का दूध पिला रहा है। जिससे मुर्गी दाना की पचास प्रतिशत बचत होने के साथ ग्रोथ भी बढ़ रही है। वह अपने कृषि फार्म पर दुग्ध डेयरी व पोलट्री फार्म का संचालन करता है। संदीप ने बताया कि डेयरी की 22 गायों का दूध मंडावा में आकर सप्लाई करता था। लेकिन चार अप्रेल को कोरोना पॉजिटिव केस मिलने पर प्रशासन ने मंडावा शहर में कफ्र्यू लगाकर बाहरी दूध सप्लाई पर पाबंदी लगा दी। जिससे दूध की बिक्री बंद हो गई। बिक्री बंद होने से दूध बचने लगा। तब उसने सोचा कि मुर्गियों को दाना डालने के बजाय गायों का दूध पिलाया जाए। दूध का सदुपयोग करने की सोच को लेकर मुर्गियों को दूध में एक लीटर हाईटोन, एक लीटर लीवर टॉनिक व गुड़ मिलाकर पिलाना शुरू कर दिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि प्रतिदिन दस क्विंटल मुर्गी दाना की जगह सिर्फ पांच क्विंटल दाना ही खर्च हो रहा है। जिससे करीब 11 हजार रुपए का दाना की रोज बचत हो रही है। जबकि दूध व टॉनिक खर्चा दाना की अपेक्षा काफी कम आता है। दूध व टॉनिक मुर्गी दाना से सस्ता और ग्रोथ भी अच्छी होती है। बिक्री नहीं होने के कारण दूध काम नहीं आ रहा था, उसका भी उपयोग होने लगा है।
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संकट में है मुर्गीपालक
कोरोना के कारण मुर्गी पालक किसान संकट में हैं। जिले की सभी 950 इकाइयां घाटे का सौदा बन गई है। जिले में मुर्गी पालन से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से करीब दस हजार लोग जुड़े हुए हैं। उनमें अधिकांश बेरोजगार हो गए हैं। हर दिन करीब 25 से 30 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। जब से कोरोना के कारण लोकडाउन हुआ है मुर्गी व चूजों की बिक्री नहीं हो रही। चूजे बाहर भी नहीं जा रहे। इस कारण इनके चूजे नहीं बिक रहे। बिक्री की दुकानें बंद होने के कारण व्यवसाय ठप हो गया है। जबकि मुर्गियों के दाने पर हर दिन खर्चा हो रहा है। पोल्ट्री फार्म संघ के कृष्ण कुमार गावडिय़ा के अनुसार इस व्यवसाय से जिले में करीब 10 हजार लोग जुड़े हुए हैं। हर दिन करीब 25 से लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। सरकार को गरीब किसानों की मदद करनी चाहिए। दस हजार लोग बेरोजगार हो गए हैं।
Published on:
29 Apr 2020 12:17 pm
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