26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

किस जिले में सिर पर सिगड़ी रखकर यात्रा निकालती हैं महिलाएं, जानें पूरी डिटेल

जैसे-जैसे संघ आगे बढ़ता है कारवां जुड़ता जाता है। यह संघ तीन दिन बाद चैत्र नवरात्र में छठ तिथि को रलावता स्थित जीणमाता धाम में मेले में पहुंचता है।

2 min read
Google source verification
jhunjhunu news

राजस्थान का जीण माता मंदिर अनूठी आस्था और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां मन्नत पूरी होने और नई मन्नत मांगने के लिए श्रद्धालु सिर पर जलती सिगड़ी रखकर कई किलोमीटर की पैदल यात्रा कर माता के दरबार में पहुंचते हैं। हर साल चैत्र नवरात्र में यह दृश्य विशेष रूप से देखे जाते हैं। जीण माता का मंदिर शेखावाटी क्षेत्र के सीकर जिले में है।

चैत्र नवरात्र के अवसर पर ‘बत्तीसीसंघ’ के श्रद्धालु चतुर्थी तिथि को सिर पर जलती सिगड़ी रखकर जीण माता के दर्शन के लिए निकलते हैं। मंगलवार को इसी परंपरा के तहत बिमला देवी, संतोष देवी, झिमली देवी, प्रहलाद सैनी सहित कई श्रद्धालु सिगड़ी लेकर रवाना हुए। इस संघ में अ​धिकतर भक्त झुंझुनूं जिले के हैं। यह पदयात्रा झुंझुनूं क्षेत्र के पचलंगी क्षेत्र व आस-पास के गांवों से रवाना होती है। यह पदयात्रा झुंझुनूं से होती हुई सीकर जिले में पहुंचती है।

पीढ़ियों से निभाई जा रही परंपरा

सुरेश पटेल, ख्यालीराम कुड़ी, बीजू टेलर, राकेश नायक और बाबूलाल जांगिड़ सहित अन्य श्रद्धालुओं ने बताया कि कई लोग वर्षों से इस परंपरा का पालन कर रहे हैं। कुछ श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो प्रतिवर्ष सिर पर जलती सिगड़ी लेकर माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह अनुष्ठान उनके संकल्प की पूर्ति और माता की कृपा प्राप्ति का माध्यम है।

कई गांवों के भक्त शामिल

ग्रामीणों ने बताया कि शेखावाटी के बाघोली, पचलंगी, पापड़ा, नीमकाथाना, नयाबास, राणासर जोधपुरा सिरोही सहित अन्य गांवों से श्रद्धालु अपने – अपने स्तर पर चैत्र नवरात्र में जीण माता धाम के लिए निशान पदयात्रा, सिरपर जलती हुई सिगड़ी लेकर रवाना होते हैं। यह श्रद्धालु चैत्र मास शुक्ल पक्ष को झड़ाया बालाजी मंदिर में एकत्रित होते हैं। इसको बत्तीसी का संघ कहा जाता है। जैसे-जैसे संघ आगे बढ़ता है कारवां जुड़ता जाता है। यह संघ लगभग तीन दिन बाद चैत्र नवरात्र में छठ तिथि को सीकर जिले के रलावता स्थित जीणमाता धाम में मेले में पहुंचता है। वहां अपने निशान अर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि कई मन्नत मांगने के लिए सिर पर जलती हुई सिगड़ी लेकर चलते हैं तो कई मन्नत पूरी होने पर जलती हुई सिगड़ी लेकर जाते हैं। यह परम्परा कई साल पुरानी है।