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जज की टिप्पणी: सरकार मूकदर्शक नहीं बने, अश्लीलता व नशा रोके

बड़े-बड़े निर्माता, निर्देशक अपने बैनर तले बनने वाली फिल्मों व वेब सिरीजों में ऐसी अश्लील सामग्री खुले आम प्रसारित कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को मूकदर्शक नहीं बनना चाहिए। निर्माता तो इससे धन अर्जन कर चांदी काट रहे हैं परंतु यह हमारे देश के बालकों का बचपन व नवयुवाओं की जवानी छीन कर उन्हें अपराध के दलदल में ले जा रहे हैं।

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जज की टिप्पणी: सरकार मूकदर्शक नहीं बने, अश्लीलता व नशा रोके

जज की टिप्पणी: सरकार मूकदर्शक नहीं बने, अश्लीलता व नशा रोके

# fansi ki saja
झुंझुनूं. पांच साल की मासूम से बलात्कार करने वाले दरिंदे शाहपुर निवासी सुनील कुमार को बुधवार को फांसी की सजा सुनाने वाले पोक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सुकेश कुमार जैन ने सरकारी सिस्टम पर बड़ा सवाल उठाया है। साथ ही इंटरनेट पर अश्लील सामग्री व नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए सरकार को उसका दायित्व याद दिलाया।
न्यायाधीश ने 16 पेज के अपने फैसले में लिखा कि मेरे द्वारा अभियुक्त के कृत्य पर मनोवैज्ञानिक विश्लेषण भी किया गया। पांच वर्षीय बालिका से बलात्कार का विकार कैसे जन्म ले सकता है? इसके पीछे जेनेटिक, शारीरिक व मानसिक कारणों के साथ दूषित वातावरण भी है। जज ने फैसले में लिखा, मेरे सामने पोक्सो अधिनियम के पिछले ढाई वर्षों में जितने भी मामले आए उनमे इंटनरेट कनेक्शन सहित सर्वसुलभ मोबाइल फोन ऐसे अपराधों की वृद्धि का एक प्रमुख कारण नजर आया। इंटरनेट में छोटे बालक बालिकाओं से वीभत्स तरीके से दर्शाए गए दृश्य हमारे बालकों व नव युवा पीढ़ी के मस्तिष्क को विकृत कर रहे हैं। उन्हें एडिक्ट बना रहे हैं। जीवन में प्रेम का अभाव, खराब संस्कार, बुरी संगत, विफलता, संरक्षक के देखरेख व नियंत्रण का अभाव व्यक्ति को उत्छृंखल बना देता है। सरकार का यह दायित्व है कि इंटरनेट पर ऐसी सामग्री पर उचित नियंत्रण का प्रयास करें। ऐसी सामग्री अब तक अज्ञात स्रोतों से प्रसारित की जाती थी, परन्तु अब बड़े-बड़े निर्माता, निर्देशक अपने बैनर तले बनने वाली फिल्मों व वेब सिरीजों में ऐसी अश्लील सामग्री खुले आम प्रसारित कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को मूकदर्शक नहीं बनना चाहिए। निर्माता तो इससे धन अर्जन कर चांदी काट रहे हैं परंतु यह हमारे देश के बालकों का बचपन व नवयुवाओं की जवानी छीन कर उन्हें अपराध के दलदल में ले जा रहे हैं। चोरी छिपे नशे का सामान बेचने वाले अपराधियों की धर पकड़ भी अपराध के रोकथाम में सहायक होगी।

#fansi ki saja
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नहीं मिला सका आंख
काले रंग की टीशर्ट, पायजामा और चप्पल पहनकर आया आरोपी जज से नजर नहीं मिला सका। जज के अधिकांश सवालों का वह सिर झुकाकर जवाब देता रहा।
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चिड़ावा में सौ रुपए में बिक रहा गांजा, एसपी जांच करें
आरोपी ने कोर्ट में बताया कि घटना के दिन उसने सुबह नौ बजे स्कूटी गैराज में खड़ी कर सोनू एंड मोनू मोटरसाइकिल वर्कशॉप सुल्ताना फाटक के पास, सुल्ताना स्टेंड चिड़ावा की दुकान पर गांजा लेने गया था। जो सौ रुपए में एक खुराक गांजा प्रदान करता है। गांजा लेने के बाद मंड्रेला रोड पर स्थित दुकान से देसी शराब लेकर भी पी थी। विशेष न्यायाधीश जैन ने एसपी को निर्देश दिए कि अभियुक्त के नशे की दुकान के कथनों की पुष्टि के लिए आवश्यक जांच/ अन्वेषण कराने की कार्रवाई करे।
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पढ़ाई व उपचार सरकार करवाए
न्यायाधीश ने यह भी आदेश दिया कि पीडि़ता को पीडि़त प्रतिकर अधिनियम के तहत मिलने वाली अधिकतम राशि प्रदान की जाए। पूर्व में अंतरिम प्रदान की गई राशि इसमें से मुजरा होगी। मासूम के उपचार पर आगे भी कोई राशि खर्च होती है तो उक्त सम्पूर्ण खर्च को सरकार द्वारा वहन करने की भी सिफारिश जरिए कलक्टर की जाती है। पीडि़ता के साथ घटी घटना उसके सम्पूर्ण उम्र के लिए सदमा है अत: ऐसी बालिकाओं के मुफ्त उचित शिक्षा/ छात्रवृत्ति के लिए नामांकित किए जाने पर विचार करने निर्देश भी सरकार को दिए जाते हैं।
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जज जिन्होंने सजा सुनाई

पोक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सुकेश कुमार जैन ने बहुत कम दिनों में दरिंदे को फांसी की सजा सुनाकर समाज में संदेश दिया कि बुरे काम का बुरा फल अवश्य मिलता है। इस फैसले के बाद इंसान को हैवान बनने का डर सताएगा। एक मार्च को कोर्ट में चालान पेश किया गया था और 17 मार्च को फैसला सुना दिया। जैन ने इससे पहले पाली में वर्ष 2016 में अपर सैशन न्यायाधीश रहते हुए धारा 302 में पांच दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी।
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इन्होंने की दमदार पैरवी

पिलानी के पास खुडानिया गांव निवासी विशिष्ट लोक अभियोजक लोकेन्द्र सिंह शेखावत ने दमदार तर्क करते हुए पीडि़ता की तरफ से पैरवी की। आरोपी को फांसी की सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शेखावत इससे पहले भी वर्ष 2018 में दौसा निवासी विनोद कुमार बंजारा को फांसी की सजा दिलवा चुके।
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अपराध करने से पहले लोग डरेंगे
एक पड़ौसी ने बारह बजे बाद आकर बताया कि मासूम बेटी को दर्द देने वाले दरिंदे को कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है। मन को थोड़ा सुकून मिला है। ऐसे फैसले होने चाहिए। सजा जल्दी मिलनी चाहिए, तभी अपराधी ऐसे अपराध करने से डरेंगे। - पीडि़ता की मां
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ऐसे फैसलों से ही अपराध रुकेंगे
घटना के बाद से ही कोई आश्वासन दे रहा था तो कोई ढांढस बंधवा रहा था। बुधवार को कोर्ट ने दरिंदे को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इससे मेरे परिवार को संबल मिला है, मगर अब फांसी के तख्ते तक पहुंचने में समय नहीं लगना चाहिए। ऐसे फैसलों से ही समाज में अपराध रुकेंगे।-पीडि़ता के पिता

31 अगस्त 2018 में हो चुकी फांसी की सजा
झुंझुनूं जिले के ग्रामीण क्षेत्र में तीन वर्षीय मासूम बच्ची से बलात्कार के मामले में न्यायाधीश नीरजा दाधीच ने दौसा जिले के अलीपुर तन महरिया निवासी विनोद कुमार बंजारा को 31 अगस्त 2018 को फांसी की सजा सुनाई थी। उस समय नीरजा दाधीच ने टिप्पणी की थी, 'कपड़े के कारण रेप जो कहे, उन्हें बतालाऊं मैं, आखिर तीन साल की बच्ची को साड़ी कैसे पहनाऊं मैं...।Ó तब भी पीडि़ता की तरफ से पैरवी लोकेन्द्र सिंह शेखावत ने की थी।
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