23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चंग-डफ की थाप पर गांवों में गूंजने लगी होली की धमाल

झुंझुनूं. रात को सर्द हवा और उस दौरान गूंजती होली की धमाल, फाल्गुनी मस्ती में चंग, डफ व बांसुरी के साथ धमाल पर थिरके युवा.. कुछ ऐसे ही नजारे कई जगह देखने को मिल जाएंगे। होली पर्वके नजदीक आने के साथ ही शहर व गांवों में कईजगह धमाल शुरू हो गई है। इधर, होली पर्व को देखते हुए डफ बनाने वाले कारीगर भी डफ बनाने में जुट गए हैं।हालांकि शहरों में होली का टे्रंडजरूर बदला है, लेकिन गांवों मे अभी भी धमाल सुनने को मिल जाएगी। होली पर्व को लेकर कारीगर डफ बनाने में जुटे हुए हैं। बसंत पंचमी से ही डफ की बिक्री शुरूहो चुकी है।

2 min read
Google source verification
jhunjhunu news

चंग-डफ की थाप पर गांवों में गूंजने लगी होली की धमाल

चंग-डफ की थाप पर गांवों में गूंजने लगी होली की धमाल

झुंझुनूं. रात को सर्द हवा और उस दौरान गूंजती होली की धमाल, फाल्गुनी मस्ती में चंग, डफ व बांसुरी के साथ धमाल पर थिरके युवा.. कुछ ऐसे ही नजारे कई जगह देखने को मिल जाएंगे। होली पर्वके नजदीक आने के साथ ही शहर व गांवों में कईजगह धमाल शुरू हो गई है। इधर, होली पर्व को देखते हुए डफ बनाने वाले कारीगर भी डफ बनाने में जुट गए हैं।हालांकि शहरों में होली का टे्रंडजरूर बदला है, लेकिन गांवों मे अभी भी धमाल सुनने को मिल जाएगी। होली पर्व को लेकर कारीगर डफ बनाने में जुटे हुए हैं। बसंत पंचमी से ही डफ की बिक्री शुरूहो चुकी है।
शहरों में मोबाइल, डीजे तक सिमटी होली
होली के पर्व को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में अभी भी उत्साह है। कई गांवों में होली की धमाल शुरूभी हो चुकी है। लेकिन शहरों में होली पर धमाल आदि का आयोजन एक रस्म अदायगी के तौर पर होने लगा है। शहरों में लोगों की व्यस्तता कहें या पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव लोक संस्कृति के कार्यक्रम महज एक दिन के होकर रह गए हैं। शहरों में तो विभिन्न संगठनों की ओर से होली पर दो-तीन घंटे का ही कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे हैं। हालांकि शहरों में अभी कुछ जगह होली के पर्व पर धमाल आदि आायोजन होते हैं, लेकिन वे नाममात्र के होते हैं।
आम की लकड़ी आती है प्रयोग में
शहर के मोहल्ला खटीकान में डफ बनाने वाले कारीगर नत्थूराम चावला ने बताया कि डफबनाने में आम की लकड़ी का प्रयोग होता है। उन्होंने बताया कि आम की लकड़ी उदयपुरवाटी के चिराना गांव से लाईजाती है।डफ का वजन करीब एक से डेढ़ किलो तक होता है। गांव के लोग होली से काफी दिन पहले ही डफ ले जाना शुरूकर देते हैं।
अब कम हुई बिक्री
गांवों सहित शहरी क्षेत्र में भी लोग धमाल की मस्ती में झूमते थे।लेकिन अब धमाल की मस्ती केवल गांवों तक ही सिमटकर रह गई है। डफ कारीगर नत्थूराम चावला ने बताया कि बसंत पचंमी से अब तक नाममात्र के डफ बिके हैं। वहीं होली तक करीब 250 डफबिकने की उम्मीद है।