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झुंझुनूं उपचुनाव परिणाम: ओला परिवार अपने राजनीतिक गढ़ को बचाने में क्यों हुई फेल, ये रहे 5 कारण

झुंझुनूं के इतिहास में भाजपा की यह सबसे बड़ी जीत है। ओला परिवार का राजनीतिक गढ़ ढह गया। 21 साल बाद भाजपा ने अपना परचम लहराया है।

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jhunjhunu result: brijendra singh ola family fail to save its political stronghold, here are the 5 big reasons

झुंझुनूं। झुंझुनूं विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में 21 साल बाद भाजपा ने अपना परचम लहराया है। सत्ता पर सवार भाजपा के राजेन्द्र भाम्बू ने यहां इतिहास दोहराते हुए फिर कमल खिलाया है। उन्होंने 90,425 वोट लेकर कांग्रेस के अमित ओला को रेकॉर्ड 42,848 मतों से हरा दिया। झुंझुनूं के इतिहास में भाजपा की यह सबसे बड़ी जीत है। इसी के साथ ओला परिवार का राजनीतिक गढ़ ढह गया। इससे पहले यहां से वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी की सुमित्रा सिंह ने जीत दर्ज की थी। झुंझुनूं में भाजपा की यह तीसरी जीत है। इसमें दो उप चुनाव शामिल हैं।

कांग्रेस की हार के बड़े कारण

पहला, ओला परिवार के प्रति परम्परागत वोटर्स में नाराजगी।

दूसरा, टिकट नहीं मिलने से अल्पसंख्यक समुदाय में नाराजगी।

तीसरा, पूरे चुनाव में कांग्रेस का एक भी बड़ा नेता प्रचार के लिए नहीं आया, स्टार प्रचारक अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा, सचिन पायलट की कमी खली।

चौथा, प्रत्याशी अमित ओला का झुंझुनूं जिला मुख्यालय पर ठहराव कम रहा।

पांचवा, हर बार ओला भाजपा की बगावत में जीतते रहे हैं, इस बार बगावत कांग्रेस में रही।

छठा, वोटर से डाइरेक्ट जुड़ाव में कमी आई। मीडिया से भी दूरी बनाई।

लाल डायरी वाले गुढ़ा के वोटों की भी रही चर्चा

राजेन्द्र गुढ़ा निर्दलीय होकर 38 हजार से ज्यादा वोट ले गए। इसकी खूब चर्चा रही। लोगों का कहना था कि भाजपा की जीत के कई कारणों में एक कारण राजेन्द्र गुढ़ा का चुनाव में उतरना भी रहा। लोगों का मानना है कि गुढ़ा ने कांग्रेस को ज्यादा नुकसान पहुंचाया। विधानसभा क्षेत्र में झुंझुनूं शहर के अनेक अल्पसंख्यक बूथों पर गुढ़ा अच्छे मत लेकर गए, हालांकि गांवों में वे ज्यादा मत नहीं ले जा सके। वहीं डाक मत पत्रों में भी गुढ़ा को 93 मत मिले।

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