
केसीसी को मिले संजीवनी तो फिर से हो संस्कृतियों का संगम
झुंझुनूं. खेतड़ी कॉपर कॉम्पलेक्स के जब सभी संयंत्र चालू थे तब यहां की संस्कृति निराली थी। खेतडीनगर कस्बा संस्कृतियों का संगम था। केरल वाले ओणम मनाते थे तो बिहारी के भोजपुरी सूर्य को अघ्र्य देकर डाला छठ मनाते थे। गुजराती जहंा डांडिया खनकाते थे तो बंगाली दुर्गा पूजा पर जोर देते थे। पंजाबी लोहड़ी मनाते थे तो सभी साथ मिलकर होली व दिवाली की मिठाई खिलाते थे। अब यह सब मीठें यादें बनकर रह गए हैं। अब फिर से संयंत्र चले तो वापस संस्कृतियों का संगम हो। देश के करीब 20 से अधिक राज्यों के लोग यहां रहते थे। सभी लोग हर त्योंहार आपस में मिलकर मनाते थे, लेकिन अब हालत यह है कि कई राज्यों के लोग तो यहां से सेवानिवृत्त होकर चले गए। अब नाम मात्र के कर्मचारी व अधिकारी बचे हैं। केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक तक के जहां 400 से 450 परिवार रहते थे अब सिमटकर सिर्फ 10 से 15 परिवार ही यहां रह रहे हैं। दक्षिण भारतीय समाज ने अय्यप्पा का मंदिर बनाया हुआ है। बिहार भोजपुरी समाज के 200 से 250 परिवार हुआ करते थे, अब सिमटकर सिर्फ 40 से 45 परिवार ही यहां पर रहते हैं, भोजपुरी समाज की छठ पूजा का कार्यक्रम अब भी होता है। पंजाबी समाज के लोग भी कम हो गए हैं।
हर राज्य के व्यंजन के रेस्टोरेंट थे
केसीसी के बाजारों में हर राज्य के लोग रहने के कारण मिनी भारत की संस्कृति होती थी। उसी अनुरूप दुकानों पर सामान भी रखा जाता था। जिस धर्म का त्योंहार होता था उसी के अनुसार बाजार सज जाते थे। हर राज्यों के व्यंजन यहां के होटल व रेस्टोरेंट पर मिलते थे।
सभी धर्मों के धर्मस्थल बने हैं खेतड़ीनगर में
खेतड़ी नगर में अलग अलग-राज्य के अनुसार धार्मिक स्थल बने हुए हैं। एक मस्जिद बनी हुई है। दो चर्च, एक गुरुद्वारा, दुर्गा मंदिर, संत रविदास मंदिर, गायत्री शक्तिपीठ, आर्य समाज मंदिर, उज्जैन मंदिर, अय्यप्पा मंदिर, भोजपुरी समाज का सरस्वती मंदिर, शिव मंदिर व सर्वधर्म समिति के मंदिर बने हुए हैं। खेतड़ीनगर की सनातन धर्म समिति पिछले 50 साल से रामलीला का मंचन कर रही है। रामलीला का मंचन इतना प्रसिद्ध था कि अलग से रामलीला मैदान बनाया हुआ था, जो पूरा खचाखच भर जाता था। अब गिने-चुने लोग ही रामलीला देखने के लिए आते हैं।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखा
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया भी खेतड़ी कॉपर कॉम्पलेक्स को बचाने के लिए आगे आ गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर केसीसी को आत्मनिर्भर भारत अभियान से जोड़कर फिर से नई तकनीक के साथ शुरू करने की मांग की है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि केसीसी को आधुनिक तकनीक के साथ जल्द शुरू किया जाए ताकि हजारों लोगों को फिर से रोजगार मिल सके। यहां तांबे के अकूत भंडार हैं। अगर केसीसी के सभी प्लांटों को फिर से शुरू कर दिया जाए तो भारत तांबे में आत्मनिर्भर हो जाएगा। भाजपा जिलाध्यक्ष पवन मावंडिया ने बताया कि केसीसी को हर हाल में बचाया जाएगा। इसके लिए जिला भाजपा भी पीएम को पत्र लिखेगी। खेतड़ी से विधायक का चुनाव लड़ चुके भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में केसीसी के बंद प्लांटों को फिर से शुरू करने की
मांग की है।
इनका कहना है...
केसीसी टाउनशिप में अलग-अलग धर्मों के 30 धार्मिक स्थल बने हुए हैं। रामलीला मंचन के समय सभी धर्मों के लोग व राज्यों के लोग बड़े उत्साह से आते। एक दूसरे के त्योहारों पर आपस में मेलजोल था। केसीसी में कर्मचारियों की संख्या कम हुई तो त्योहारों पर भी असर पडऩे लगा। सभी धर्मों के मंदिर तो बने हैं लेकिन कार्यक्रम अब पहले जैसे नहीं रहे।
बलजीत चौधरी, महामंत्री सनातन धर्म समिति खेतड़ीनगर
सभी धर्मों का सामंजस्य खेतड़ीनगर की विशेषता होती थी। कर्मचारियों के परिवारों में आपस में प्रेम था, अब कर्मचारियों की संख्या कम होने से त्योंहारों की रोनक भी कम होने लगी है दक्षिण भारत के लोगों के परिवारों की संख्या पहले 400 के लगभग थी अब सिर्फ 10 से 15 परिवारी रहे हैं ,अय्यप्पा मंदिर में जरूर नियमित कार्यक्रम होते रहते हैं।
शशिधरण, केरल निवासी
Published on:
12 Jun 2020 10:00 am
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