लक्ष्मीकांत@ शर्मा सूरजगढ़. खाटूश्यामजी स्थित मुख्य श्याममंदिर के शिखर पर कई वर्षों से सूरजगढ़ का निशान चढ़ाया जाता है। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है निशान को खाटू शिखर बंद पर चढ़ाए जाने के पीछे एक कथा जुड़ी है। वर्ष 1920 विक्रम सम्वत् 1975 फाल्गुन शुक्ला द्वादशी को खाटू धाम में विभिन्न स्थानों से आए भक्तों में सर्वप्रथम निशान चढ़ाने एवं शिखर बन्द पर निशान चढ़ाने की होड़ मच गई। यद्यपि सूरजगढ़ का निशान पुराने समय से चढ़ता आ रहा था। फिर भी दूर-दूर से आए सभी श्याम भक्त अपना निशान सर्वप्रथम अर्पित करने की अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहे। बाद में सर्व सम्मति से यह निर्णय किया गया कि जो भी भक्त श्याम मंदिर खाटू धाम में लगे ताले को बिना चाबी खोलेगा। वही निशान सबसे पहले चढ़ाएगा।
दूर-दूर से आए सभी भक्तों को मौका दिया गया। लेकिन कोई भी मोरछड़ी (मोर पंखी से) ताला नहीं खोल पाया। बाद में भक्त गोवर्धन दास ने अपने शिष्य मंगलाराम अहीर को मोर पंखी से ताला खोलने का आदेश दिया। मंगलाराम ने अपने गुरु के आदेश पर मंदिर गेट पर लगे ताले को मोर पंखी से खोल दिया। इसके बाद से सूरजगढ़ का निशान खाटू धाम के मुख्य शिखिर पर फाल्गुन मास की प्रत्येक बारस को चढाया जाता है जो लगातार साल भर लहराता है।
प्रवासी भी जाते हैं
सूरजगढ़ से जाने वाले श्याम निशान पदयात्रा में सूरजगढ़ के अलावा आस-पास के ग्रामीण व प्रवासी लोग बड़ी सख्या में शामिल होकर सूरजगढ़ से खाटू धाम को जाते हैं। भक्त हजारी लाल सैनी ने बताया कि यात्री सूरजगढ़ से सुल्ताना, गुढा उदयपुरवाटी गुरारा से मण्ढा होते हुए दशमी को खाटूधाम पहुंच कर बारस को मंदिर पर निशान अर्पित करते हैं। होली के दिन यात्री दल वापस सूरजगढ़ पहुंचेगा।
सूरजगढ़ से श्याम बाबा की पदयात्रा 12 व 13 को
सूरजगढ़. प्रतिवर्ष की भांति श्याम बाबा के मेले में कस्बे से खाटूधाम जाने वाले पदयात्रियों का जत्था नव-निर्मित मंदिर से 12 मार्च को व पुराने श्याम मंदिर से 13 मार्च को प्रस्थान करेगा। श्याम मंदिर से खाटूधाम में चढ़ाने वाले ध्वज की स्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह शाम आरती में बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे है। मंदिर में बाबा श्याम की प्रतिमा का रोज फूलों से श्रृंगार किया जाता है। मंदिर की सुन्दर सजावट भी की गई है। इस अवसर पर प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंच कर दर्शन का लाभ ले रहे हैं।