खेतड़ी. रामकृष्ण मिशन आश्रम में स्वामी विवेकानंद एवं खेतड़ी के रिश्तों को चिरस्थायी बनाने के लिए नवनिर्मित अजीत-विवेक राष्ट्रीय संग्रहालय का रविवार को उद्घाटन किया गया। देश-विदेश से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं व देश के विभिन्न हिस्सों से आए रामकृष्ण मिशन से जुड़े सैंकड़ों संतों की उपस्थिति में स्वामी विवेकानंद की जय के उद्घोष के बीच राष्ट्रीय संग्रहालय का उद्घाटन मुख्य अतिथि रामकृष्ण मिशन वैलूडमठ के महासचिव स्वामी सुवीरानंद ने किया।
आचार्य भंवरलाल शास्त्री ने पूजा करवाई। इस अवसर पर पोलोग्राउण्ड में आध्यात्मिक सभा हुई। जिसकी अध्यक्षता शशांकानंद महाराज ने की। स्वामी सर्वलोकानंद, स्वामी निखलेश्वरानंद, स्वामी आत्मश्रृद्धानंद विशिष्ट अतिथि थे। मुख्य अतिथि स्वामी सुवीरानंद ने कहा कि आज सम्पूर्ण विश्व में विवेकानंद विचारधारा का व्यापक प्रचार-प्रसार स्वाभाविक हो रहा है। विश्व के अनेक भागों से उनके पास इसके पत्र प्राप्त हो रहे हैं। आज स्वामीजी के विचारों की प्रासंगिकता बढ़ रही है। यह देश के लिए उत्तम है। संग्रहालय में स्वामी विवेकानंद के जीवन से समाधि तक की समस्त घटनाओं को दर्शाया गया है। स्वामी विवेकानंद व राजा अजीत सिंह व खेतड़ी से जुड़ी समस्त घटनाओं को भी दिखाया गया है। आश्रम सचिव स्वामी आत्मनिष्ठानंद ने बताया कि स्वामी विवेकानंद एवं राजा बहादुर अजीत सिंह दोनों के सम्बन्ध विश्व इतिहास में विशेष घटना है तथा उनसे जुड़े खेतड़ी कस्बे का भी महत्व है। संचालन स्वामी यज्ञधरानंद ने किया। इस अवसर पर गजसिंह अलसीसर, अशोक सिंह शेखावत, डा. राघवेन्द्र पाल, पूर्व विधायक दाताराम गुर्जर, प्रधान मनीषा गुर्जर, पूर्व पालिकाध्यक्ष सीताराम वर्मा, प्रदीप सुरोलिया, धर्मेन्द्र सिंह तोमर, ईश्वर पाण्डे, सूरज कुमार भास्कर, श्यामसुन्दर सिहोड़, विश्वनाथ शर्मा, पृथ्वीराज वर्मा, गोपालराम सैनी सहित सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
सात वर्षों में पूर्ण हुआ कार्य अजीत-विवेक संग्रहालय का कार्य तथा फतेहविलास महल के जीर्णोद्धार कार्य सात वर्षों तक लगातार चला।
4 अक्टूबर 2011 को इस कार्य का शिलान्यास मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया था। इसमे राज्य सरकार व केन्द्र सरकार के द्वारा लगभग 8 करोड़ रुपयों की राशि खर्च हुई है।
करौली व धोलपुर के लगे हैं पत्थर
फतेह विलास महल के जीर्णोद्धार में कारीगरों ने करौली व धोलपुर के पत्थरों की घड़ाई करके तथा चूने व बनास नदी की बजरी में पौराणिक तरीके से गुड़-मेथी मिला कर पिसाई कर किया गया है तथा संग्राहलय के मुख्य हाल में पौराणिक राजस्थानी शैली के भित्ति चित्र उकेरे गए हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम
दो दिवसीय उद्घाटन समारोह में नृत्यागना जगत ज्योति बैनर्जी का ओडिसी नृत्य, शिप्रा संस्थान भिलाई के कलाकारो द्वारा भगिनी निवेदिता पर प्रकाश व ध्वनि के माध्यम से कार्यक्रम, स्वामी अनंतआत्मानंद के भजन व कलाकार शेखर सेन द्वारा स्वामी विवेकानंद पर एंकाकी प्रस्तुति दी गई।