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Kiran kheruka जानें कौन है किरण खेरूका, राजस्थान के पिलानी से है दिल का रिश्ता

किरण खेरूका राजस्थानी लोक गीतों, कथाओं और भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार का भी काम कर रही है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कोलकाता और मुंबई के गायकों के साथ सहयोग से राजस्थानी लोक गीतों को और कथाओं को यू ट्यूब पर अपलोड करवाया है। ताकि आज की युवा पीढी भी वो देख और सुन सके।

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Kiran kheruka जानें कौन है किरण खेरूका, राजस्थान के पिलानी से है दिल का रिश्ता

किरण खेरूका

देश के प्रसिद्ध उद्योगपति घरानों में से एक खेरूका परिवार की मुखिया और समाजसेविका किरण खेरूका एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए राजस्थान के झुंझुनूं जिले के पिलानी कस्बे में पहुंची। राजस्थान पत्रिका से विशेष बातचीत में किरण खेरूका ने कहा कि वे सालों बाद पिलानी आई है। ऐसा लग रहा है घर आई हूं और घर आकर सभी को अच्छा लगता है। उन्होंने बताया कि 1941-42 का समय उनके लिए काफी मायने रखता है। पहले लड़कियों के पढने के लिए अलग से स्कूल नहीं हुआ करते थे। मुझे आज भी याद है कि जब मुझे स्कूल में पढने के लिए भेजा गया था तो वो बॉयज स्कूल था। इसलिए मेरे बाल कटवा दिए गए थे और कुर्ता पायजामा पहनकर हम स्कूल जाया करते थे। 1941 में कोलकाता में कई स्कूल बंद हो गई थी। तब वे ही नहीं, बल्कि मारवाड़ी परिवार के काफी बच्चे परिवार के साथ वापस लौट आए थे। वे भी पिलानी आ गई थी। उनका ननिहाल लोयलका परिवार में था। इसलिए नानाजी के पास रहकर उन्होंने पढाई की। उसी वक्त बिरला बालिका विद्यापीठ शुरू हुई थी। उन्हें खुशी है कि वे विद्यापीठ की शुरुआती बैच की छात्रा रही।

हवेली से पैदल जाया करते थे

पुरानी यादें ताजा करते हुए किरण खेरूका ने बताया कि वे हवेली से पैदल स्कूल जाया करती थी। उनके मामाजी घोड़ा गाड़ी रखते थे। तो आते वक्त उनके साथ आ जाती थी। वो समय अलग था। तब के पिलानी और अब के पिलानी में काफी बदलाव है। उन्होंने बताया कि रात के समय उनके नानाजी कहानियां सुनाया करते थे। तो सारे बच्चे तो सुनते ही थे। गांव के लोग भी आते थे।

लोक गीतों और कहानियों में शिक्षा, बढती है समझ भी

किरण खेरूका राजस्थानी लोक गीतों, कथाओं और भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार का भी काम कर रही है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कोलकाता और मुंबई के गायकों के साथ सहयोग से राजस्थानी लोक गीतों को और कथाओं को यू ट्यूब पर अपलोड करवाया है। ताकि आज की युवा पीढी भी वो देख और सुन सके। उन्होंने बताया कि बचपन में सुनीं हुई लोक कथा और लोक गीतों से उन्हें जीवन में काफी कुछ सीखने को मिला। इसलिए इनसे ना केवल शिक्षा मिलती है। बल्कि समझ में भी बढोतरी होती है।

पढना-लिखना अच्छा, लेकिन घमंड ना करें
उन्होंने आज की दौर की महिलाओं के लिए कहा कि महिलाओं को पढ़ना-लिखना और आगे बढ़ना तो ठीक है। लेकिन कई महिला अपनी पढाई-लिखाई और उन्नति का घमंड कर लेती है। वो सही नहीं है। उन्होंने बताया कि इसी घमंड के कारण पारिवारिक जीवन खराब हो रहा है। छोटी छोटी बातों पर कलह और तलाक जैसी स्थिति नहीं आनी चाहिए। इससे पूरे परिवार पर बुरा प्रभाव होता है। उन्होंने कहा कि पहले भी कई समाजों की महिलाएं काम करती थी। लेकिन उन्होंने बिना घमंड के काम किया। स्त्री को स्वभाव में प्यार, माफी और विनम्रता को नहीं छोड़ना चाहिए। जब ये सब खो बैठती है तो जीवन नष्ट हो जाता है।

मातृभाषा और देश को नीचा दिखाने के खिलाफ हूं

किरण खेरूका ने बताया कि एक समय था जब पूरे हिंदुस्तान में विलायत का भूत चढ़ गया था। अंग्रेजी भाषा का भूत सवार हो गया था। उन्हें अंग्रेजी से कोई आपत्ति नहीं है। क्योंकि अंग्रेजी से एक खिड़की खुलती है दुनिया में अपना दम दिखाने के लिए। लेकिन मातृ भाषा और देश को नीचा दिखाने के वे सख्त खिलाफ है। उन्होंने बताया कि हजारों सालों तक हमारे देश ने कई तकलीफें सही है। फिर भी हमारा देश और संस्कृति अजर अमर है। इस बात को युवाओं को समझना होगा और इस संस्कृति को आगे तक ले जाना होगा। उन्होंने बताया कि वे अब तक लोक गीतों, लोक कथाओं और संस्कृति धरोहर को लेकर सात किताब लिख चुकी है। सबसे पहली किताब उन्होंने शेखावाटी की कहानियां लिखी है। ये वो कहानियां थी। जो बचपन में वे नानाजी से सुना करती थी।

कई पुस्तकें लिख चुकी

किरण खेरूका का राजस्थानी लोक कथाओं, राजस्थानी गीतों एवं भारतीय संस्कृति से विशेष लगाव रहा है।
उनका यह लगाव उनकी पुस्तकों शेखावाटी की कहानियां, वृहद अकबर-बीरबल विनोद, जीवन, दुनिया रंग रंगीली, भारत तब से अब एवं यत्र तत्र से स्पष्ट देखा जा सकता है। इनकी प्रस्तुति सातवीं पुस्तक शेखावाटी के गीत में शेखावाटी के जनजीवन एवं परंपराओं का दर्शन होता है। राजस्थान के प्रसिद्ध उद्योगपति आत्माराम पाडिया की पुत्री किरण खेरूका मुंबई में बोरोसिल ग्लास प्रोडक्ट्स कंपनी के अलावा अनेक नामी-गिरामी कंपनियों में शीर्ष पद पर है।


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