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झुंझुनू

जानें एक जुलाई से न्याय संहिता में महिला अपराध की धाराएं

एसपी राजा​र्षि राज वर्मा ने बताया कि नई धाराएं महिला अपराध, महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करती हैं। वे पीड़ितों को न्याय दिलाने और महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित समाज बनाने में मदद करती हैं।

झुंझुनूJun 23, 2024 / 01:20 pm

Rajesh

sp office jhunjhunu

एसपी ऑफिस झुंझुनूं

देश में भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम के स्थान पर एक जुलाई से नए आपराधिक कानून लागू होने हैं। नए कानून के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए झुंझुनूं पुलिस ने भी अभियान तेज कर दिया है। आज हम आपको बता रहे हैं कि एक जुलाई से लागू होने वाली भारतीय न्याय संहिता में महिलाओं पर अत्याचार से जुड़ी धाराओं में क्या बदलाव किया गया है।
1. पुरानी धारा 376 : बलात्संग के लिए दंड – जो कोई, बलात्संग करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन या दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
नई धारा: 63 भारतीय न्याय संहिता: दोनों में से किसी भांति के कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक हो सकेगी, दण्डित होगा व जुर्माने का भी दायी होगा।
2. पुरानी धारा 304बीभादंस: दहेज मृत्यु – जो कोई दहेज मॄत्युकारित करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा ।
नई धारा 80 भारतीय न्याय संहिता: किसी महिला की दहेज के लिए मृत्यु कारित करने पर कारावास सात वर्ष से कम नहीं होगा परंतु आजीवन कारावास की हो सकेगी।

3. पुरानी धारा 354 भादंस: स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग – जो कोई किसी स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए कि तद्द्वारा वह उसकी लज्जा भंग करेगा, उस स्त्री पर हमला करेगा या आपराधिक बल का प्रयोग करेगा, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
नई धारा 74 भारतीय न्याय संहिता: महिला की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग करने पर किसी भांति के कारावास जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी किंतु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने का भी दायी होगा।
4. पुरानी धारा 326 ए भादंस: एसिड हमला – जो कोई स्वेच्छा से एसिड को इस ज्ञान के साथ फेंकता और प्रशासित करता है कि यह चोट पहुंचाएगा या ऐसा चोट पहुंचाने के इरादे से करेगा, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि न्यूनतम दस वर्ष तक की होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
नई धारा 124 भारतीय न्याय संहिता: जो कोई किसी व्यक्ति के भाग को उस व्यक्ति पर अम्ल भेंककर ऐसा कारित करने के आशय से ऐसी क्षति कारित करेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
5. पुरानी धारा 498 ए भादंस: किसी महिला का पति या पति का रिश्तेदार द्वारा क्रूरता करना – किसी महिला का पति या पति का रिश्तेदार होते हुए, ऐसी महिला के साथ क्रूरता करता है, तो उसे कारावास की सजा होगी, जिसकी अवधि तीन साल तक बढ़ सकती है और साथ ही वह दंडनीय होगा।
नई धारा 85 भारतीय न्याय संहिता: किसी महिला के साथ क्रूरता करना- तीन वर्ष तक के कारावास से दण्डनीय और जुर्माने का भी दायी होगा।

6. शादी/नौकरी आदि का झांसा देकर सहवास करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत दोनों में किसी भांति के ऐसी अवधि के कारावास से दण्डनीय होगा, जो दस वर्ष तक का हो सकेगा, और जुर्माने के लिए भी दायी होगा।
(जैसा एसपी राजर्षि राज ने पत्रिका को बताया)

इनका कहना है

नई धाराएं महिला अपराध, महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करती हैं। वे पीड़ितों को न्याय दिलाने और महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित समाज बनाने में मदद करती हैं।
-राजर्षि राज, वर्मा एसपी झुंझुनूं राजस्थान

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