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वीडियो में सुनें एक मां की मार्मिक अपील

बेटे को बचाने के लिए उसकी मां सविता शर्मा ने आर्थिक मदद अपील की है। उसका कहना है कि उनके पास पैसे नहीं है, कहां से लेकर आएं, कुछ सूझ नहीं रहा है, किसी से आर्थिक मदद मिले तो बेटे को किसी डॉक्टर को दिखाएं और बीमारी का पता लगवाकर इलाज कराएं।

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सूरजगढ (झुंझुनूं).

क्षेत्र के हीरवा गांव में एक परिवार के सदस्य अज्ञात बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इस बीमारी से परिवार में दो लड़कों की मौत हो गई। जबकि एक लड़का इस बीमारी से जूझ रहा है।
इलाज के लिए पैसे नहीं होने के कारण परिवार के लोग चिंतित हैं। उनके पास बीमार बेटे की सेवा के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है।

यह हो रहा है
दरअसल करीब नौ साल की उम्र में लड़कों का वजन अचानक बढ़ने लगता है। इससे चलने, उठने, बैठने में दिक्कत होने लगती है। इस बीमारी से परिवार में दो लड़कों की मौत 18 साल की उम्र में हो गई। तीसरे लड़के के भी अब यही बीमारी हो गई है।

दो भाइयों के दो बेटों की मौत

गांव के नरेन्द्र शर्मा के सबसे बड़े बेटे राहुल की 18 साल की उम्र में मौत हो गई। वह नौ साल का हुआ था, तब उसका वजन बढने लगा। इसके बाद चलना, उठना, बैठना बंद हो गया। ऐसा ही नरेन्द्र के भाई सुरेंद्र के बेटे अरूण के साथ हुआ। उसका भी नौ साल की उम्र में वजन बढ़ने लगा। उसने इलाज भी करवाया। लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। करीब 19 साल की उम्र में अरूण की मौत हो गई।

अब बबलू को हुई वही बीमारी

नरेन्द्र के सबसे छोटे बेटे बबलू को भी इसी बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है। वह भी नौ साल का हुआ तब तक हंसी खुशी खेलता था और स्कूल भी जाता था। लेकिन अचानक उसका भी वजन बढ गया। अब वह उठने, बैठने और चलने की स्थिति में नहीं है। ठीक से बोल भी नहीं पा रहा है।

इलाज के पैसे नहीं, योजनाओं से अनजान

नरेंद्र ने बताया कि वह कृषि कार्य करता है। उसके पास बेटे के इलाज के लिए पैसे नहीं है। वह बस अपने बेटे की सेवा कर रहा है। सरकारी अभियान या योजनाओं से भी परिवार अनजान है।

मां कर रही अपील

बेटे को बचाने के लिए उसकी मां सविता शर्मा ने आर्थिक मदद अपील की है। उसका कहना है कि उनके पास पैसे नहीं है, कहां से लेकर आएं, कुछ सूझ नहीं रहा है, किसी से आर्थिक मदद मिले तो बेटे को किसी डॉक्टर को दिखाएं और बीमारी का पता लगवाकर इलाज कराएं।

इनका कहना है
जेनेटिक डिजीज हो सकती है। शुक्रवार को टीम भेजकर डायग्नोसिस करवाया लिया जाएगा, जो भी संभव हो सकेगा, मदद करेंगे।

– राजकुमार डांगी, सीएमएचओ झुंझुनू

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