13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मलमास में कौनसे कार्य करें और कौनसे टालें

सूर्य के धनु राशि एवं मीन राशि में स्थित होने की अवधि को ही खरमास अथवा मलमास कहा जाता है। मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2022 को मनाया जाएगा। मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व होता है।

2 min read
Google source verification
मलमास में कौनसे कार्य करें और कौनसे टालें

मलमास में कौनसे कार्य करें और कौनसे टालें

#malmas 2021

झुंझुनूं. 16 दिसम्बर से मलमास शुरू होगा। मलमास में वैवाहिक कार्य और शुभ कार्य बंद हो जाते हैं। गृह प्रवेश नींव पूजन, नवीन व्यापार, विवाह, सगाई सहित सभी शुभ कार्य मलमास में वर्जित माने गए हैं।
शादी विवाह आदि कार्य नहीं किए जाते हैं।
मलमास 16 दिसंबर को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से शुरू होकर मकर संक्रांति 14 जनवरी 2022 पौष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को 2.30 बजे दिन रहेगा।
पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि जब सूर्य गोचरवश धनु और मीन में प्रवेश करते हैं तो इसे क्रमश धनु संक्रांति एवं मीन संक्रांति कहा जाता है। सूर्य किसी भी राशि में लगभग एक माह तक रहते हैं। सूर्य के धनु राशि एवं मीन राशि में स्थित होने की अवधि को ही खरमास अथवा मलमास कहा जाता है। मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2022 को मनाया जाएगा। मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही मांगलिक और शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे। हर सौर वर्ष में एक सौर मास खरमास कहलाता है जिसे मलमास के नाम से भी जाना जाता है।


सूर्य को जल चढ़ाएं, दान करें
मिश्रा के अनुसार मलमास के महीने में पूजा-पाठ, धर्म-कर्म, मंत्र जाप, भागवत गीता, श्रीराम की कथा, पूजा, कथावाचन, और विष्णु भगवान की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। दान, पुण्य, जप और भगवान का ध्यान लगाने से कष्ट दूर होते हैं। इस मास में भगवान शिव की आराधना करने से कष्टों का निवारण होता है। शिवजी के अलावा मलमास में भगवान विष्णु की पूजा भी फलदायी मानी जाती है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर तांबे के लोटे में जल, रोली या लाल चंदन, शहद, लाल पुष्प डालकर सूर्यदेव को अघ्र्य दें। ऐसा करना बहुत शुभ फलदायी होता है।


सवा माह के लिए थमी शहनाई

झुंझुनूं. 13 दिसंबर के विवाह लग्न के साथ एक बार फिर शादियों पर ब्रेक लग गया। अब सवा महीने बाद अगले साल जनवरी के तीसरे सप्ताह में शादियों के बाजे बजेंगे।
पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि अगले साल विवाह के 106 शुभ मुहूर्त में अनेक जोड़े एक दूसरे के हमसफर बनेंगे।
साल 2022 में विवाह मुहूर्त की भरमार रहेगी।
विवाह मुहूर्त इस बार 2022 में रात्रि के लग्न के करीब 40 रहेंगे और विवाह के लिए दिन के मुहूर्त करीब 42 बताए गए हैं। उसी के साथ सायंकाल गोधूलि बेला में भी 24 शादियों के शुभ मुहूर्त विवाह लग्न इस बार रहेंगे।

विवाह में 10 रेखा के सावे का महत्व
विवाह लग्न में अक्सर लोग रेखा को महत्व देते हैं। मान्यता है कि 10 रेखा का सावा सबसे श्रेष्ठ होता है। इसके अलावा सात ,आठ ,नौ रेखा के विवाह ज्यादा शुभ माने जाते हैं।
वर्ष 2022 में 13 विवाह लग्न 10 रेखा के रहेंगे।
20 विवाह लग्न 9 रेखा के रहेंगे।
अ_ारह विवाह लग्न 8 रेखा के रहेंगे और 16 विवाह मुहूर्त 7 रेखा के शुभ मुहूर्त है।

गोधूलि लग्न का महत्व
पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि पहले गोधूलि लग्न में ही सारे शुभ कार्य विवाह संपन्न किए जाते थे मगर आधुनिक की चकाचौंध बैंड बाजा फोटोग्राफी की बढ़ती मांग के बीच लोग गोधूलि लग्न को भुलाने लगे हैं।