
एतिहासिक है पापड़ा गांव का तालाब
पचलंगी . राजस्थान के झुंझुनूं जिले के काटली नदी के मध्य में बसा पापड़ा गांव उदयपुरवाटी उपखण्ड से 40 किमी दूरी पर सीकर जिले की सीमा से सटा हुआ है। गांव का प्राचीन तालाब प्रसिद्ध है। गांव के उत्तर में शहीद स्मारक व प्राचीन तालाब है। वहीं तालाब परिसर में बालाजी , शिव व शक्ति मंदिर स्थित है। गांव के पूर्व में हरिदास बाबा का स्थान है। गांव के मध्य भाग में गोपीनाथ व शनि देव का मंदिर स्थित है।
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गांव के युवाओं में सेना के प्रति जज्बा है। गांव के निकले अनेक सैनिक व अधिकारी देश की सेवा कर रहे हैं। गांव के भानूप्रताप सिंह आर्मी ट्रेनिंग कमाण्ड बटालियन में ब्रिगेडियर के पद पर शिमला में तैनात हैं । जागीराम मिठारवाल वर्तमान में कर्नल के पद पर कार्यरत हैं। प्रमोद कुमार बड़सरा सेवानिवृत कर्नल हैं। दिनेश कुमार बड़सरा लेप्टिनेंट के पद पर कार्य कर रहे हैं। युवराज सिंह शेखावत लेप्टिनेंट है। इन्द्रराज रैपसवाल, सुरेश कुमार पायल सहायक कामान्डेड के पद कार्यरत हंै। विनोद कुमार बड़सरा वीरेन्द्र सिंह पायल, विक्रम बड़सरा, राज सिंह बड़सरा असिस्टेंट कमान्डेड के पद पर अपनी सेवा दे रहे हैं। गांव के दिग्विजय सिंह शेखावत व उनकी पत्नी श्यामा राठौड़ आरएएस अधिकारी है। रामवतार सोनी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत है , मुकेश शर्मा बालविकास अधिकारी हंंै ।
गांव के गोपी सोनी, श्रीराम सैनी,उम्मेद बड़सरा, झाबर मल सैनी ने जानकारी दी कि गांव काटली नदी के बहाव में टापू के रूप में पहाड़ी की पापड़ नुमा चट्टान पर बसा होने के कारण गांव का नाम पापड़ा पड़ा । नरसा राम ,गोपाल सिंह खरींटा, सुभाष मोर्य सहित अन्य ने जानकारी दी कि यह गांव चर्म उद्योग के लिए शेखावाटी में जाना जा रहा है।गांव के पश्चिम दिशा में पहाड़ी पर भोमिया जी का मंदिर है।
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यह हुए शहीद -
11 फरवरी 1948 को शहीद हुए पापड़ा के शहीद लादूराम जितरवाल को वीर चक्र मिल चुका है। गांव के कान सिंहवाली ढ़ाणी के सुरेश कुमार बड़सरा भी देश सेवा में पीछे नहीं रहा । बड़सरा 7 राज राइफल में राजौरी सेक्टर डडोत नाले में तैनाती के दौरान तीन आतंकवादियों को मारकर 21 नवबंर 2009 को शहीद हो गए थे।
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बेटियां भी नहीं रही पीछे -
पापड़ा गांव की रहने वाली देश की पहली सेना की लड़ाकू विमान चालक मोहना सिंह सहित गांव की बेटियां भी देश सेवा में आगे है ।
पहचान -
पापड़ा गांव के प्रवेश द्वार पर बना प्राचीन तालाब आस - पास में पर्यटन का केन्द्र है। तालाब के नाम से ही पापड़ा गांव की पहचान है। राकेश शर्मा,शेर सिंह खरींटा,गोपाल महाजन,महेश शर्मा सहित अन्य ने बताया कि यहां पर स्थित शक्ति मंदिर व बालाजी मंदिर पर प्रतिवर्ष हनुमान जयंती पर वार्षिक मेला लगता है। गांव का दीनदायाल आश्रम भी श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। गांव के पहलवानों ने कुश्ती दंगल में अपनी पहचान बनाई। गांव के कई परिवारों की तीन पीढियां कुश्ती दंगल में नाम रोशन कर रही है।
समस्या -
सरकारी बस सेवा से नहीं जुड़ा गांव -
पापड़ा गांव अभी सरकारी बस सेवा से नहीं जुड़ा हुआ है। यहां लोगों के आने - जाने के लिए निजी बस सेवा या निजी वाहनों का उपयोग करना पड़ता है। वहीं बालिका की शिक्षा लिए भी एक मात्र 8 वीं तक विद्यालय है। बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए नीमकाथाना या अन्य कस्बों में जाना पड़ता है। गांव की चिकित्सा व्यवस्था भी चरमराई हुई है।
जनसंख्या -6604
घर -1108
साक्षरता दर 61.37 प्रतिशत
( वर्ष 2011 के अनुसार )
Published on:
13 Sept 2020 10:56 pm
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