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Rajasthan News : राजीव गांधी खेल स्टेडियम पर जमकर तोड़फोड़, ‘बवाल’ के बीच हिरासत में EX-MLA, जानें पूरा मामला?

Navalgarh Stadium Demolition | झुंझुनूं के नवलगढ़ में भारी बवाल! पूर्व मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा हिरासत में, राजीव गांधी स्टेडियम पर चला प्रशासन का बुलडोजर। जानें क्या है 1947 की स्थिति बहाल करने का पूरा मामला।

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Navalgarh Stadium Demolition

Navalgarh Stadium Demolition

शेखावाटी की राजनीति का केंद्र रहे नवलगढ़ कस्बे में बुधवार को भारी हंगामा हुआ। परसरामपुरा स्थित राजीव गांधी खेल स्टेडियम की दीवार और उसके कुछ हिस्सों को प्रशासन ने जेसीबी मशीनों की मदद से ढहा दिया। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी तनाव की स्थिति बन गई, जिसे देखते हुए पुलिस ने पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा और उनके भाई सहित कई समर्थकों को जबरन हिरासत में ले लिया।

भारी पुलिस जाब्ता और प्रशासनिक घेराबंदी

प्रशासन ने इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए 'चक्रव्यूह' जैसी तैयारी की थी। बुधवार सुबह से ही नवलगढ़ तहसील के प्रशासनिक अधिकारी जेसीबी मशीनों और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच गए।

मौके पर करीब 250 पुरुष पुलिसकर्मी और 60 महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। जैसे ही डॉ. राजकुमार शर्मा अपने समर्थकों के साथ विरोध करने पहुँचे, पुलिस ने उन्हें तुरंत हिरासत में लेकर गाड़ी में बैठा दिया।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला नदी बहाव क्षेत्र में हुए अतिक्रमण से जुड़ा है। राजस्थान हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि परसरामपुरा के पास नदी के बहाव क्षेत्र में अवैध निर्माण हुआ है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि वर्ष 1947 की राजस्व स्थिति को बहाल किया जाए।

जिला कलक्टर के निर्देश पर हुई जांच में नवलगढ़ तहसील न्यायालय ने स्टेडियम की 705 मीटर लंबी दीवार और 684 वर्गमीटर भूमि को अतिक्रमण माना। 7 मई को नवलगढ़ तहसीलदार के पत्र पर कार्रवाई करते हुए कलक्टर ने 13 मई (आज) को अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए थे।

युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ : डॉ. राजकुमार शर्मा

हिरासत में लिए जाने से पहले पूर्व मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा ने प्रेस वार्ता कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि यह स्टेडियम उनके कार्यकाल में खिलाड़ियों की सुविधा के लिए बनाया गया था। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि जनहित के नाम पर बने खेल मैदान को तोड़ना राजनीति से प्रेरित है। मंगलवार को ही प्रशासन ने शांतिभंग की आशंका में सैकड़ों लोगों को पाबंद कर दिया था, ताकि बुधवार को कार्रवाई में बाधा न आए।

स्टेडियम का कौन सा हिस्सा टूटा?

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, केवल उन्हीं हिस्सों पर बुलडोजर चलाया गया है जो नदी क्षेत्र के अतिक्रमण की श्रेणी में आते थे।

स्टेडियम की 705 मीटर लंबी दीवार और पानी की टंकी के पास का हिस्सा ध्वस्त किया गया। जनहित को देखते हुए जलदाय विभाग के नलकूप और पीडब्ल्यूडी की सड़क को फिलहाल नहीं हटाया गया है।

मौके पर डटे रहे आला अधिकारी

नवलगढ़ एसडीएम और पुलिस उप अधीक्षक डॉ. राजकुमार शर्मा से लगातार समझाइश करते रहे, लेकिन जब बात नहीं बनी तो पुलिस को कड़ा रुख अपनाना पड़ा। नवलगढ़ कस्बे में इस कार्रवाई के बाद से ही सन्नाटा और तनाव का माहौल है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी है।

नवलगढ़ का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि नदी बहाव क्षेत्र और सरकारी जमीन पर हुए निर्माण अब प्रशासन की रडार पर हैं, चाहे वे कितने ही प्रभावशाली व्यक्ति ने क्यों न बनाए हों। अब देखना यह होगा कि डॉ. राजकुमार शर्मा की हिरासत और स्टेडियम के टूटने के बाद नवलगढ़ की राजनीति क्या मोड़ लेती है।

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