
नवलगढ़ में जोहड़ की जिस भूमि पर भरता था पशु मेला, वहां अब कांटेदार तारों से कब्जा
नवलगढ़ (झुंझुनूं)। नवलगढ़ कस्बे में जोहड़ की 13.95 हेक्टेयर जमीन पर कभी प्रदेश का प्रसिद्ध पशु मेला भरता था। प्रदेशभर के लोग यहां पशु बेचने और खरीदने आते थे। आज इस बेशकीमती जमीन पर फसल खड़ी है। जोहड़ की यह भूमि मास्टर प्लान में सार्वजनिक सुविधा क्षेत्र के रूप में अनुमोदित है। इस हिसाब से इस भूमि पर खुला क्षेत्र, बाग, खेल मैदान आदि होने चाहिए, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के कारण यह जमीन तारों की बाड़ में कैद होकर रह गई है।
चुनाव में बना सबसे बड़ा मुद्दा, सरकार बदलते ही तोड़ी तारबंदी
विधानसभा चुनाव में बदराणा जोहड़ पर तारबंदी बड़ा मुद्दा रहा। इस मुद्दे को लेकर तत्कालीन विधायक राजकुमार शर्मा लोगों के निशाने पर रहे और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के नतीजे आते ही कुछ लोग बदराणा जोहड़ पहुंचे और एक हिस्से की तारबंदी तोड़ डाली।
आरोपों के घेरे में ट्रस्ट
जोहड़ की जमीन पर बद्रीदास चौधरी चैरिटेबल ट्रस्ट ने मालिकाना हक जता तारबंदी कर रखी है। प्राचीन बावड़ी, गऊ घाट और धर्मशाला को तुड़वा दिया। कुछ समय बाद इस भूमि के चारों तरफ तारबंदी करवा खेती करना शुरू कर दिया। ट्रस्ट ने 13.95 में 0.77 हेक्टेयर जमीन बेची। जबकि, 23 जनवरी 1976 को ट्रस्ट का देवस्थान विभाग में पंजीकरण हुआ था, तब इस भूमि का उपयोग सार्वजनिक तथा चाराग्राह भूमि होना बताया गया था। भूमि पर तालाब, कुआं, धर्मशाला आदि भी दर्शाए गए थे।
बदराणा जोहड़ में वर्ष 2019 तक भरा पशु मेला
बदराणा जोहड़ में वर्ष 2019 तक पशु मेला भरता रहा है। वर्ष 2015 तक नवलगढ़ पालिका ने मेले का आयोजन किया। इसके बाद वर्ष 2016 से 2019 तक बद्रीदास चौधरी (गोयनका) चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से मेला भरवाया गया। इसके बाद यह काम थम गया।
'यह ट्रस्ट की खातेदारी की जमीन है। यहां हम गायों के लिए हरा चारा उगा रहे हैं। नगरपालिका ने कई वर्ष तक पशु मेला भरवाया, लेकिन ट्रस्ट को एक रुपया भी नहीं दिया। कुछ लोग बेवजह बदनाम कर रहे हैं। हम तो पूर्वजों के नाम के लिए यहां बालाजी का मंदिर, पाथ-वे सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने की योजना बना रहे हैं।' - इन्द्रचंद गोयनका, सचिव, बद्रीदास चौधरी चेरिटेबल ट्रस्ट
'कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए जोहड़ में शीघ्र ही स्थाई रूप से पशु मेला भरवाना शुरू करेंगे।'- विक्रमसिंह जाखल, विधायक नवलगढ़
'मास्टर प्लान में बदराणा जोहड़ भूमि का उपयोग खुला क्षेत्र व खेल मैदान के रूप में दर्शाया गया है। मास्टर प्लान के अनुसार वर्ष 2031 तक इस भूमि का उपयोग परिवर्तन करना संभव नहीं है।' - अनिल कुमार, ईओ नगरपालिका
Published on:
01 Jan 2024 05:30 pm
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