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हमारे बिना मनाते नहीं तुम दिवाली तुम्हारे बिना भी ईद मनाता कौन है…

नवलगढ़. राष्ट्रीय कवि चौपाल झुंझुनूं एवं सीकर शाखा तथा जीडी फाउंडेशन लखनऊ के तत्वावधान में बुधवार रात को कस्बे की एकलव्य कोचिंग एंड डिफेंस एकेडमी में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का रंग देर रात तक जमा रहा।

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हमारे बिना मनाते नहीं तुम दिवाली तुम्हारे बिना भी ईद मनाता कौन है...


हमारे बिना मनाते नहीं तुम दिवाली तुम्हारे बिना भी ईद मनाता कौन है...
देर रात तक जमा कवि सम्मेलन का रंग
नवलगढ़. राष्ट्रीय कवि चौपाल झुंझुनूं एवं सीकर शाखा तथा जीडी फाउंडेशन लखनऊ के तत्वावधान में बुधवार रात को कस्बे की एकलव्य कोचिंग एंड डिफेंस एकेडमी में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का रंग देर रात तक जमा रहा। राष्ट्रीय कवि चौपाल झुंझुनूं शाखा के अध्यक्ष युवा कवि मुकेश मारवाड़ी और सीकर शाखा के अध्यक्ष युवा कवि कुमार अनिल जज्बाती ने बताया कि मुख्य अतिथि बीकानेर से आए राष्ट्रीय कवि चौपाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष क़ासिम बीकानेरी थे। अध्यक्षता कवि श्रीकांत पारीक ने की। विशिष्ट अतिथि समाजसेवी कैलाश चोटिया थे। अररिया बिहार के शायर साजिद इक़बाल ने हर शख्स मुहब्बत का पैग़ाम देता है तो नफरत की वबा फैलाता कौन है, हमारे बिना मनाते नहीं तुम दिवाली तुम्हारे बिना भी ईद मनाता कौन है... पेश की। ग़ुजऱात के कवि विनोद स्वप्निल ने अपने गीत यह इश्क़ क्या है के माध्यम से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। लखनऊ के शायर अखिलेश सिन्हा ने मैं ज़मीन तेरी तू मेरा आसमान है... अल्का अस्थाना एवं हल्द्वानी उत्तराखंड की गज़़लकारा सौम्या दुआ ने सरस्वती वंदना पेश की। कोलकाता के शायर ख़ुर्शीद आलम ने आईना मैंने दिखाया जैसे चाहा जब तलक तर्जुमा उसने सुनाया..., बिहार के समस्तीपुर के शायर पप्पू राय दानिश, क़ासिम बीकानेरी, कवयित्री नीतू गुप्ता, मलेशिया की कवयित्री डॉ. गुरिंदर गिल, कुमार अनिल जज़्बाती, फैजाबाद के शायर मुज़म्मिल फिदा, नीरज सिन्हा, डॉ देवी प्रसाद वर्मा, कवि मुकेश मारवाड़ी, कवि कृष्ण कुमार सैनी, देवास से हरिशंकर पाटीदार, मौलाना सलीम क़ासमी, दौसा की रानू गोठवाल, भरतपुर से अज्ञानी दास, अभिषेक योगी, देवेंद्र दर्पण, बीकानेर से माजिद ख़ान ग़ौरी, लखनऊ से रेखा बोरा, मैनपुरी से मनोज मंजू, देहरादून से जयि़ा हिन्दवाल आदि ने भी एक से बढक़र एक रचनाएं पेश की। कवि हरीश हिंदुस्तानी ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। आभार राष्ट्रीय कवि चौपाल के विशिष्ट राष्ट्रीय संरक्षक डॉ रघुनाथ मिश्र ने ज्ञापित किया।


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