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जज ने कहा ‘सजा ऐसी हो, जिससे जीवनभर चारदीवारी में रहकर आंसू बहाए’, जानिए पूरा मामला

जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने वृद्ध पिता की हत्या के दोषी पुत्र को आजीवन कठोर कारावास व दस हजार रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।

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रिश्वत लेने के मामले में जेके लोन अस्पताल के पूर्व अधीक्षक के विरूद्ध कोर्ट में चालान पेश

रिश्वत लेने के मामले में जेके लोन अस्पताल के पूर्व अधीक्षक के विरूद्ध कोर्ट में चालान पेश

झुंझुनूं/पत्रिका। जिला एवं सेशन न्यायाधीश देवेन्द्र दीक्षित ने वृद्ध पिता की हत्या करने के दोषी उसके पुत्र छोटूराम पुत्र शिवमाल उर्फ श्योमाल निवासी नितड़ो की ढाणी तन भौड़की थाना गुढ़ागौड़जी को बुधवार को आजीवन (अंतिम सांस तक) कठोर कारावास व दस हजार रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।

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प्रकरण के अनुसार अगस्त 2019 को राजकीय अस्पताल गुढ़ागौड़जी में आरोपी के भाई हरीराम ने रिपोर्ट दी कि वे 4 भाई हैं। 9 अगस्त को करीब सवा 9 बजे उसके पिता शिवमाल (80) उनके खेत में बने मकानों के पास बनी कच्ची रसोई घर के पास बैठे थे। उसी समय उसका भाई छोटूराम अपने हाथ में बाकड़ा (दांतला) लेकर आया तथा उसके पिता पर जान से मारने के लिए उनकी गर्दन पर कई वार किए। जिससे उसके पिता की मौके पर मौत हो गई। पुलिस ने जांच के बाद चालान पेश किया। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए लोक अभियोजक भारत भूषण शर्मा ने इस्तगासा पक्ष की तरफ से गवाहों के बयान करवाए। दस्तावेज प्रदर्शित किए। न्यायालय में तर्क दिया कि जिस उम्र में पिता को पुत्र के सहारे की जरूरत होती है, उस उम्र में आरोपी ने अपने वृद्ध पिता की सेवा करने के स्थान पर उसकी क्रूरतापूर्ण हत्या करना जघन्य कृत्य है तथा आरोपी को मृत्युदण्ड दिया जाए। न्यायाधीश ने पत्रावली पर आई साक्ष्य का बारिकी से विश्लेषण करते हुए आरोपी छोटूराम को सजा व जुर्माने से दंडित किया है।

फैक्ट फाइल
घटना: 09 अगस्त 2019
गवाह: 10
साक्ष्य पेश: 29
सजा: 26 जुलाई 2023

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हर पिता की यह इच्छा रहती है कि बेटा वृद्धावस्था में उसका ध्यान रखेगा
जज ने अपने निर्णय में लिखा कि आरोपी ने अपने पिता की नृशंस हत्या की है। पुत्र के जन्म पर खुशियां मनाना और पूरे मोहल्ले में लड्डू बांटना भारतीय परम्परा में शामिल है। प्रत्येक पिता की अपने पुत्र से जायज आशा रहती है कि वृद्धावस्था में उसका ध्यान रखेगा, लेकिन वही पुत्र जब 80 साल के वृद्ध पिता की निर्दयता से हत्या करता है तो इससे पूरा समाज प्रभावित होता है। यह सामाजिक दृष्टि से भी अधिक निन्दनीय है। लोक अभियोजक की ओर से ऐसे आरोपी के लिए की गई मृत्युदण्ड की मांग बलहीन नहीं है परन्तु उसे मृत्युदण्ड की बजाय जीवनपर्यन्त कारावास की सजा दिया जाना न्यायोचित होगा, ताकि वह जीवनपर्यन्त जेल की चारदीवारी में अपने जन्मदाता पिता के प्रति किए गए कृत्य के सम्बन्ध में आत्मविश्लेषण कर आंसू बहाए।

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