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राजकीय बीडीके अस्पताल : इलाज के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर मरीज

jhunjhununews : दरअसल अस्पताल में इन दिनों मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मरीज जिले के दूर-दराज इलाकों से अल सुबह चलकर आउटडोर समय में अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन यहां चिकित्सकों को दिखाने के लिए कई घंटे लाइनों में लगना पड़ता है। पहले पर्ची काउंटर पर खड़े रहो, फिर चिकित्सकों के चैंबरों के बाहर लाइन में लगे रहो। ऐसे में कई मरीजों को तो बिना चिकित्सकीय परामर्श के ही लौटने को मजबूर होना पड़ता है।

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राजकीय बीडीके अस्पताल : इलाज के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर मरीज

राजकीय बीडीके अस्पताल : इलाज के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर मरीज

झुंझुनूं. बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की मिसाल रह चुके जिले के सबसे बड़े राजकीय भगवानदास खेतान अस्पताल में इन दिनों मरीजों को कई जगह लम्बी लाइनों में लगकर इलाज लेना पड़ रहा है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन की तरफ से मरीजों के इस दर्द को कम करने के उपाय नहीं किए जा रहे। दरअसल अस्पताल में इन दिनों मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मरीज जिले के दूर-दराज इलाकों से अल सुबह चलकर आउटडोर समय में अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन यहां चिकित्सकों को दिखाने के लिए कई घंटे लाइनों में लगना पड़ता है। पहले पर्ची काउंटर पर खड़े रहो, फिर चिकित्सकों के चैंबरों के बाहर लाइन में लगे रहो। ऐसे में कई मरीजों को तो बिना चिकित्सकीय परामर्श के ही लौटने को मजबूर होना पड़ता है। मजबूरी में उन्हें निजी चिकित्सक की शरण लेनी पड़ती है।

छह पर्ची, नौ दवा व दो जांच काउंटर हैं संचालित

बीडीके अस्पताल में वर्तमान में आउटडोर में दिखाने के लिए पांच पर्ची काउंटर संचालित हैं। जबकि एक इमरजेंसी में पर्ची काउंटर है। इसी तरह अस्पताल में नौ दवा काउंटर हैं, जहां पर मरीजों को नि:शुल्क दवा मिलती है। इसके अलावा दो काउंटर जांच के लिए हैं। मरीजों के बढ़ते दबाब को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन को आसानी से पर्ची और दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की जरूरत है।


ढाई से तीन हजार के बीच रहती है ओपीडी

मौसमी बीमारियों के चलते वर्तमान में बीडीके अस्पताल की ओपीडी रोजाना औसतन ढाई हजार के करीब पहुंच गई है। जबकि पहले औसतन पन्द्रह सौ के करीब रहती थी। वर्तमान में जुकाम, बुखार, उल्टी-दस्त, मलेरिया, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया समेत अन्य बीमारियों के रोगी आ रहे हैं। जिले के सरकारी व निजी अस्पतालों में इन दिनों मरीजों की संख्या में इजाफा हो गया है।

यूं समझें कतारों की गणित

पहली लाइन-ओपीडी पर्ची

दूसरी लाइन-चिकित्सक परामर्श

तीसरी लाइन- लैब में जांच सैम्पल

चौथी लाइन-एक्स-रे/सीटी स्कैन

पांचवीं लाइन-जांच रिपोर्ट लेना

छठी लाइन-चिकित्सक को रिपोर्ट दिखाकर दवा लिखवाना

सातवीं लाइन-दवा केन्द्र से दवा लेना

आठवीं लाइन-दवा को समझना


मौसमी बीमारियों के मरीज आ रहे हैं। चिकित्सक मुस्तैद हैं। सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। काउंटरों पर मैन पावर को बढ़ाया जा रहा है। एक अक्टूबर से नई व्यवस्था कर दी जाएगी।

डॉ. कमलेश झाझडिय़ा, पीएमओ बीडीके अस्पताल (झुंझुनूं)

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